ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
वन विभाग ने वन पंचायतों से जुड़े ग्रामीणों को रोजगार की मुख्यधारा से जोड़ने का बीड़ा उठाया है। नरेंद्रनगर वन प्रभाग ग्रामीण इलाकों में उगाई जाने वाली फसलों को ऑर्गेनिक उत्पाद का तमगा दिलाने पर काम रहा है। जिससे पहाड़ के उत्पादों को नेशनल व इंटरनेशनल बाजार तक पहुंचाया जा सके। योजना को जापान इंटरनेशनल कॉरपोरेशन एजेंसी (जाइका परियोजना) के माध्यम से अमलीजामा पहनाया जा रहा है।
नरेंद्रनगर वन प्रभाग की 51 वन पंचायतों में हिम उत्थान एनजीओ जरिए ग्रामीणों से बातचीत कर उत्पादित फसलों और वातावरण आदि की जानकारियां जुटाई जा रही हैं। इसका डाटा तैयार कर वन प्रभाग ग्रामीणों को उनकी भूमि के अनुसार बीज उपलब्ध कराएगा। इसमें अखरोट, दाल, मसाले, मसरूम और मधुमक्खी पालन आदि शामिल हैं। ग्रामीणों के उत्पाद तैयार होने के बाद वन विभाग उनके प्रोसेसिंग और पैकेजिंग आदि कराने में सहयोग करेगा। खासबात यह है कि वन विभाग ही ग्रामीणों के उत्पाद को ऑर्गेनिक होने का सर्टिफिकेट भी दिलाएगा। जाइका की माध्यम से संचालित योजना का मुख्य उद्देश्य वन पंचायतों के बाशिंदों को घर बैठे ही रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। योजना के तहत पंचायतों में शुरुआत में जल और भूमि संरक्षण का काम शुरू कर दिया गया है।
ऋषिकेश में मंडी बनाने की भी योजना
वन पंचायतों के किसानों को उनके उत्पाद के लिए मंडी उपलब्ध कराने की भी योजना पर वन विभाग विचार कर रहा है। इसके लिए विभाग ऋषिकेश में ऑर्गेनिक उत्पाद मंडी खोलने पर विमर्श कर रहा है। हालांकि, इससे पहले ग्रामीणों के उत्पादों को प्रोसेसिंग और पैकेजिंग तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
योजना को लेकर हुई बैठक
मुनिकीरेती स्थित नरेंद्रनगर वन प्रभाग कार्यालय में बृहस्पतिवार को डीएफओ धर्म सिंह मीणा ने विभागीय अधिकारियों की बैठक ली। इस दौरान उन्होंने वनकर्मियों को योजना से अवगत कराया। अधिकारियों को संबंधित क्षेत्रों में योजना को सफल बनाने के लिए जुटने का कहा। इसके साथ ही पूर्व में किए गए पौधरोपण व अन्य आवश्यक जानकारियों को भी जुटाया। इस अवसर पर एसडीओ देवप्रयाग डीपी बलूनी और वन क्षेेत्राधिकारी नरेंद्रनगर एसपी शर्मा, शिवपुरी रेंजर स्पर्श काला, माणिकनाथ रेंजर केएस रावत, सकलाना के रेंजर बुद्घि प्रकाश आदि मौजूद थे।
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जाइका की ओर हिम उत्थान एनजीओ को डाटा संकलन के काम में लगाया गया है। विस्तृत जानकारी मिलने के बाद योजना पर आगे का कार्य शुरू किया जाएगा। इसके तहत 51 वन पंचायतों के अलग-अलग माइक्रो प्लान तैयार कर वृहद योजना बनाई जाएगी। फिलहाल वन पंचायतों में भूमि और जल संरक्षण पर जोर दिया जा रहा है, जिसमें पर्यावरण संवर्धन के लिए पौधरोपण कराना शामिल है।
-धर्म सिंह मीणा, डीएफओ, नरेंद्रनगर