ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश।
गंगा स्वच्छता के लिए बने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) अब ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम से लिंक होंगे। निर्माण एवं अनुरक्षण इकाई (गंगा) इसके लिए जर्मन तकनीकी का सहारा ले रही है। एसटीपी में लगने वाले सेंसर व अन्य उपकरणों के माध्यम से पानी की शुद्धता को सरकार की वेबसाइट पर देखा जा सकेगा।
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी नमामि गंगे परियोजना में सिर्फ गंगा की जलधारा को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए एसटीपी ही नहीं बनाए जा रहे हैं, बल्कि उन्हें ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम से भी जोड़ा जा रहा है। तीर्थनगरी के स्वर्गाश्रम क्षेत्र में गंगा किनारे बने तीन एमएलडी के एसटीपी को इस सिस्टम से लिंक करने का काम शुरू कर दिया गया है।
सात साल में ही जवाब देने लगा एसटीपी
स्वर्गाश्रम में सीवर के दूषित पानी को फिल्टर करने के लिए स्थापित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट सात साल में जवाब देने लगा है। प्लांट में पानी को साफ करने के लिए लगी मशीनें सही तरह से काम नहीं कर रही। लिहाजा, निर्माण एवं अनुरक्षण इकाई गंगा एसटीपी को अपग्रेड कर रही है। जिस पर करीब दो करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। प्लांट में फिल्टर के लिए दो नई यूनिट लगाई जा रही हैं, जिसके माध्यम से दूषित पानी को केंद्र सरकार की गाइड लाइन के अनुसार साफ किया जा सकेगा।
कोट्स
दूषित पानी को साफ करने के बाद उसकी गुणवत्ता की जांच के लिए जर्मन टेक्नालॉजी से लैस सिस्टम लगाया गया है, जोकि ऑनलाइन मॉनिटरिंग वेबसाइट से लिंक होगा। इसकी कमान केंद्र सरकार के गंगा पुनरुद्धार मंत्रालय के पास है। सरकार ने नई गाइड लाइन जारी की है, जिसमें गंगा में छोड़े जाने वाले पानी के मानक को सिस्टम से जांचा जाएगा। स्वर्गाश्रम के अलावा राज्य के कई अन्य एसटीपी में इस तकनीकी का इस्तेमाल किया जा रहा है।
- संदीप कश्यप, प्रोजेक्ट मैनेजर, निर्माण एवं अनुरक्षण इकाई (गंगा)।