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मलेथा स्टोन क्रशर का मामला फिर उछला

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कीर्तिनगर। मलेथा स्टोन क्रशर का मामला एक बार फिर उठ गया है। ग्रामीणों को आशंका है, कि नियम विरुद्ध संचालित होने पर निरस्त किए गए क्रशरों को दोबारा संचालित किया जा सकता है, जिसके विरोध में ग्रामीणों ने एसडीएम/तहसील कार्यालय में दो घंटे का सांकेतिक धरना-प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्होंने तहसीलदार के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजते हुए पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय जनता के हितों को देखते हुए उचित निर्णय लेने की मांग की। सोमवार को बड़ी संख्या में मलेथा गांव के ग्रामीण तहसील कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने धरना देते हुए कहा कि मलेथा गांव पहाड़ में कृषि के लिए प्रसिद्ध है। वर्ष 2014 में शासन ने मलेथा और इसकी सीमा से सटे चौपड़ियों में एक साथ पांच क्रशरों के संचालन की अनुमति दी थी। इसके विरोध में 13 अगस्त 2014 से जन आंदोलन शुरू हुआ। 3 जून को 2015 को गढ़वाल मंडल आयुक्त ने स्थलीय निरीक्षण कर स्वीकृत/संचालित सभी स्टोन क्रशरों को मानक विरुद्ध पाया था। निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर शासन ने क्रशर स्वीकृति के शासनादेश रद्द कर दिए थे, लेकिन अब दोबारा इन क्रशरों को संचालित करने की कोशिश की जा रही है। यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। शासन मंडलायुक्त पौड़ी की रिपोर्ट नजरअंदाज कर बिना प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संस्तुति के क्रशरों को संचालन की अनुमति देने की तैयारी कर रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि वह दोबारा क्रशरों का संचालन नहीं होने देंगे।
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ज्ञापन में विमला देवी, देव सिंह नेगी, रामेश्वरी देवी, खेम सिंह चौहान, वीर सिंह, सुशीला देवी, सुलोचना, सुशीला राणा, पार्वती, शांति, नंदा देवी, पदमा, मीनाक्षी व बलवीर आदि के हस्ताक्षर हैं।
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