ब्यूरो/अमर उजाला/विकासनगर
अपने उम्दा स्वाद के लिए पहचाने जाने वाली दून की रोज सेंटेड, कलकतिया, शाही और बेदाना किस्मों की लीची बाजारों में पहुंच चुकी है, लेकिन इस बार लीची का स्वाद काफी मंहगा पड़ रहा है। इसकी मुख्य वजह आंधी-तूफान से हुआ नुकसान है। काश्तकारों के अनुसार आंधा-पानी से करीब 30-35 प्रतिशत उत्पादन कम हुआ है।
दून घाटी लंबे समय से लीची के लिए मशहूर रही है। यहां की चटक रंग लिए गुलाब की खुशबृू वाली लीची हमेशा से ही लोगों को आकर्षित करती रही है। हर साल दून में लीची का 8.500 हजार मीट्रिक टन से अधिक का उत्पादन होता है, लेकिन इस साल मई और जून माह में आए आंधी-तूफान से उत्पादन को झटका लगा है। इसके चलते करीब 30-35 प्रतिशत तक उत्पादन घट गया है। बागवानों का कहना है कि मार्च और अप्रैल माह में पेड़ों में आए बौर से अच्छो उत्पादन की उम्मीद थी, लेकिन मई और जून माह में चले आंधी-तूफान की वजह से काफी नुकसान पहुंचा। इसका सीधा असर अब लीची के दाम पर देखने को मिल रहा है। फल की दुकान लगाने वाले रमेश ने बताया कि बीते साल लीची 60-70 रुपये किलो थी, लेकिन इस साल 80-100 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रही है।
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इस बार आंधी-तूफान की वजह से लीची को काफी नुकसान पहुंचा है। इस साल आंधी-तूफान के कारण लीची का उत्पादन 30-35 प्रतिशत तक घट गया है। इससे बागवानों को भी काफी नुकसान हुआ है।
-डॉ. एसएस सिंह, प्रभारी वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र ढकरानी