श्रीनगर। कर्मचारियों के जीपीएफ (गवर्नमेंट प्रोविडेंट फंड) मामले में राज्य सरकार ने गढ़वाल विवि को उच्च शिक्षा के माध्यम से प्रस्ताव भेजने को कहा है। राज्य सरकार के पास गढ़वाल विवि के कर्मचारियों की 44 करोड़ के लगभग जीपीएफ राशि जमा है, जिसका भुगतान कई वर्षों से लटका हुआ है।
मंगलवार देर शाम गढ़वाल विवि की कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल, कुलसचिव डा. एके झा, वित्त अधिकारी डा. पदमाकर मिश्र, उपकुलसचिव अनीस व शिक्षक एसोसिएशन के महासचिव डा. वाईपी रैवानी ने देहरादून में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत से इस संबंध में वार्ता की। बुधवार को विवि के कुलसचिव डा. एके झा, वित्त अधिकारी पदमाकर मिश्र व उपकुलसचिव वित्त अधिकारी ने वित्त सचिव के साथ बैठक की। गढ़वाल विवि के केंद्रीय विवि बनने से पूर्व कर्मचारियों का जीपीएफ कोषागार में जमा होता था। जनवरी 2009 तक यह राशि 11 करोड़ थी। केंद्रीय विवि नियमों के अनुसार विवि कर्मचारियों का जीपीएफ कंट्रीब्यूशन स्टेट बैंक में जमा करने लगा। वर्ष 2009 के बाद से सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों व शिक्षकों उनकी गेज्युटी व प्रोविडेंट फंड स्टेट बैंक के संबंधित खाते से ही भुगतान करता रहा है, लेकिन इस खाते में अब इतनी राशि नहीं रह गई है, कि वह सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों व शिक्षकों को जीपीएफ का भुगतान कर सके। जबकि प्रदेश सरकार के कोषागार में वर्ष 2009 से पूर्व की 11 करोड़ की धनराशि बढ़ कर ब्याज सहित 44 करोड़ के करीब हो गई है। बताया जा रहा है कि ब्याज प्रतिशत को लेकर गढ़वाल व राज्य सरकार के वित्त विभाग में सहमति नहीं बन पा रही है। विवि प्रशासन 11 करोड़ की राशि पर सवा 8 प्रतिशत के हिसाब से ब्याज मांग रहा है, लेकिन राज्य सरकार इस पर राजी नहीं है। कुलपति प्रो. नौटियाल ने बताया कि मुख्यमंत्री ने वित्त सचिव के साथ बैठक कर समस्या का समाधान करने के लिए कहा। वित्त अधिकारी डा. पदमाकर मिश्र ने कहा कि शासन के साथ आयोजित बैठक सकारात्मक रही। जीपीएफ मामले में विवि प्रशासन की ओर से उच्च शिक्षा विभाग के माध्यम से प्रस्ताव भेजा जाएगा।