श्रीनगर। गढ़वाल केंद्रीय विवि में पांच दिवसीय नेशनल रिसर्च मैथौडोलाजी कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। इस दौरान विषय विशेषज्ञों ने कहा कि शोधार्थियों के मन में दृढ़ इच्छा शक्ति हो तो संसाधनों की कमी आड़े नहीं आती है। विषय विशेषज्ञों ने आंचलिक समस्याओं का संदर्भ लेते हुए शोध किए जाने पर भी विशेष बल दिया।
रविवार को गढ़वाल विवि के व्यापार प्रबंधन विभाग की ओर से चौरास परिसर में पांच दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन किया गया। मुख्य अतिथि कुलपति (कार्यवाहक) प्रो. एससी बागड़ी ने कहा कि वर्तमान समय में अध्ययन एवं अध्यापन के क्षेत्र में चुनौतियों को देखते हुए केंद्रीय विश्वविद्यालयों को भी प्रौद्योगिक संस्थानों की तरह शोध के लिए धनराशि आवंटित की जानी चाहिए। शोध छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अगर आपके मन में बेहतर करने की दृढ़ इच्छा शक्ति है, तो संसाधनों की कमी आड़े नहीं आती है। जेएनयू के डा. मनोज कुमार ने कहा कि शोध किसी समस्या के हल तक पहुंचने का सीढ़ीनुमा रास्ता है। कार्यशाला में प्रो. एसके गुप्ता, डा. प्रदीप ममगाईं, डा. राहुल बहुगुणा, डा. पुष्कर नेगी आदि ने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन डा. दीपक बिष्ट ने किया।