ब्यूरो/अमर उजाला,ऋषिकेश।
यमकेश्वर प्रखंड के गांव सड़क योजनाओं की मंजूरी के वर्षों बीतने के बाद भी संपर्क मार्ग से नहीं जुड़ पा रहे हैं, लेकिन रसूखदारों द्वारा ताबड़तोड़ स्थापित किए जा रहे होटल, रिजॉर्ट व बीच कैंप आसानी से अनधिकृत तरीके से यातायात मार्गों से बेरोकटोक जोड़े जा रहे हैं। इनमें से रत्तापानी क्षेत्र में नॉन जेडए व वनभूमि पर एक रिजॉर्ट तक निर्माणाधीन सड़क का मुद्दा सूबे के वनमंत्री तक पहुंच चुका है, मगर दोनों महकमों के अधिकारियों के संयुक्त निरीक्षण के बावजूद इस मामले में कुछ नहीं हुआ। गौरतलब है कि यमकेश्वर प्रखंड में आधा दर्जन से अधिक सड़कें एक से डेढ़ दशक से स्वीकृत हैं, जिनमें से कई सड़कों के मामले में वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया के चलते नहीं बन पा रही हैं। सड़कों को वित्तीय स्वीकृति के बावजूद ग्रामीण पगडंडियां नापने को विवश हैं।
दूसरी ओर क्षेत्र में बैराज-लक्ष्मणझूला-कांडी नेशनल हाईवे के इर्द-गिर्द बीते दो वर्षों से ताबड़तोड़ बनाए जा रहे होटल, रिजॉर्ट, रेस्टोरेंट, कैंप आदि तक पहुंचने के लिए राजस्व व वन विभाग की भूमि पर अनधिकृत तौर पर बिना अनुमति संपर्क मार्गों का निर्माण किया जा रहा है। मगर इन मामलों में अभी तक पौड़ी प्रशासन और राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क प्रशासन हरकत में नहीं आया है। स्थानीय लोगों की मानें तो रसूखदारों की मनमानी पर प्रशासन व टाइगर रिजर्व का कोई अंकुश नहीं है। वह इस मामले में सरकारी महकमों पर मिलीभगत का आरोप भी लगाते हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र में गांवों को जोड़ने के लिए वर्ष 2006 से अब तक कई सड़कें स्वीकृत हैं, जिन पर आज तक कार्य शुरू नहीं हो पाया है।
यहां बनी बन गई सड़कें
केस स्टडी 1 : रत्तापानी क्षेत्र में कालू गदेरा तोक से कबधार तोक के लिए एक रसूखदार के निर्माणाधीन भवन के लिए अवैध तौर पर पांच सौ मीटर सड़क का निर्माण किया गया। सड़क शुरुआत में राजस्व भूमि और इसके बाद वन विभाग की भूमि पर बनाई गई है। इसके बाद यह सड़क रजिस्टर्ड भूमि तक पहुंचती है।
केस स्टडी 2 : करौंदी तोक में बने रिजॉर्ट के लिए आधा किमी. सड़क निर्माण किया गया है। उक्त सड़क काफी हद तक राजस्व विभाग की नॉनजेडए भूमि पर बनाई गई है।
केस स्टडी 3 : रत्तापानी क्षेत्र के लक्ष्मणझूला-कांडी नेशनल हाईवे स्थित कालू गदेरा तोक से हेंवल नदी तक सड़क उतारी गई है। राजस्व विभाग की भूमि पर बनी पगडंडियों का अवैध ढंग से चौड़ीकरण करके हेंवल नदी से अवैध खनन सामग्री के ढुलान के लिए बनाया गया है।
जांच को बनाई टीम ने साधी चुप्पी
उक्त सड़कों की जांच के लिए राजस्व विभाग व वन विभाग की टीम ने संयुक्त निरीक्षण भी किया, मगर मामला रसूखदारों से जुड़े होने के कारण इसे रफा-दफा कर दिया गया। वर्तमान में उक्त दोनों मार्गों पर बाकायदा सीसी सड़क का निर्माण करा दिया गया है।
वर्षों बाद भी यह सड़कें नहीं बन पाई
- एससीपी योजना से आठ किमी. अंबेडकर ग्राम घाईकल-पटना संपर्क मार्ग
- स्टेट सेक्टर से नौ किमी. फूलचट्टी-कोटा मोटर मार्ग
- स्टेट सेक्टर से नीलकंठ -गरुड़चट्टी बाईपास मोटर मार्ग
- घट्टूगाड़-पलेलगांव मोटर मार्ग
- मागथा-बोंगा-बीरकाटल-बैरागढ़ मोटर मार्ग।
------------------
वन व राजस्व भूमि पर बिना अनुमति अनधिकृततौर पर एप्रोच मार्गों के निर्माण का मामला संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा हुआ है तो इस मामले को दिखवाया जाएगा और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
-- सुशील कुमार, जिलाधिकारी पौड़ी गढ़वाल।