- सन् 1979 में तीन माह के लिए कालसी में शिफ्ट हुआ चकराता वन प्रभाग का कार्यालय
- जंगल में लगने वाली आग बुझाने के लिए समय पर नहीं पहुंच पाते वनकर्मी
अमर उजाला ब्यूरो
विकासनगर/त्यूनी।
सन् 1979 में शीतकाल के दौरान तीन माह के लिए कालसी में शिफ्ट हुआ चकराता वन प्रभाग का कार्यालय 39 वर्ष बाद भी चकराता नहीं लौटा है। जिसका असर अब फायर सीजन में देखने को मिलता है। जहां से जंगल में लगने वाली आग बुझाने के लिए कर्मचारियों को पहुुंचने में कई घंटे लग जाते हैं, तब तक लाखों की वन संपदा जल जाती है।
वर्ष 1979 से पूर्व गर्मियों में वन प्रभाग का कार्यालय चकराता से संचालित किया जाता था। वहीं सर्दियों में यह कार्यालय कालसी में शिफ्ट कर दिया जाता था। यह दूरी 45 किमी है। सन् 1979 में सर्दियों में भी तीन माह के लिए कार्यालय कालसी शिफ्ट हुआ था। अधिकारियों ने अपनी सहूलियत के हिसाब से इसे वहीं से संचालित करना शुरू कर दिया। जिस वजह से जंगल में लगी आग की घटनाओं की बेहतर मानीटरिंग नहीं हो रही है। अब तक क्षेत्र के विभिन्न रेंजों कार्यालयों से सटे जंगलों में चार बार आग लग चुकी है, लेकिन हर बार विभाग की टीम सूचना के काफी देर बाद घटना स्थल पर पहुंची जबकि पूर्व तक कार्यालय के चकराता से संचालित होने के कारण सूचना के कुछ देर बाद ही टीम घटना स्थल पर पहुंच जाती थी।
मालूम हो कि चकराता जौनसार बावर का केंद्र बिंदु हैं। यहां से सभी रेंज कार्यालय एक समान दूरी पर पड़ते हैं। जंगल में लगी आग की बेहतर मानीटरिंग हो सके। इसके लिए ब्रिटिशकाल में चकराता में ही वन प्रभाग कार्यालय खोला गया। यहां आइएफएस स्तर के डीएफओ की नियमित तैनाती से सभी वन सुरक्षित थे। कर्मचारियों की सहूलियत के लिए चकराता-त्यूनी मार्ग पर जंगलों के किनारे प्रभागीय कार्यालय के साथ ही आवासीय भवन का निर्माण किया गया। शीतकाल में महज तीन माह के लिए कार्यालय कालसी में शिफ्ट किया जाता था। लेकिन जब से अधिकारियों ने कार्यालय को कालसी से संचालित करना शुरू किया है तब से फायर सीजन में जंगल में लगी आग की बेहतर मानीटरिंग नहीं हो रही है। कभी भी अधिकारी घटना स्थल पर ठीक समय पर नहीं पहुंच पाते। समाजसेवी दर्शन लाल डोभाल, रामलाल सेमवाल, शूरवीर डोभाल आदि का कहना है कि शिकायत के बाद भी कार्यालय को चकराता शिफ्ट नहीं किया जाता। कहा पूर्व की तरह व्यवस्था के चालू होने से जंगलों की बेहतर मॉनिटरिंग हो सकेगी।
50 हजार हेक्टेयर में फैला हैं जंगल
चकराता वन प्रभाग का जंगल 50 हजार हेक्टेयर में फैला हुआ है। जिसके अंतर्गत मोल्टा, देवघार, बावर, रिखनाड़ और रिवर रेंज आती है। यहां साल, शीशम, देवदार, रई, मुरंडा, चीड़, तुन, बांज, बुरांश, कैल, आंवला और रीठा के घने जंगल हैं। जिसमें हिरन, गुल, काकड़, भालू, गुलदार और कस्तूरी मृग मिलते हैं। 50 हजार हेक्टेयर में से वन प्रभाग का करीब 36 हजार हेक्टेयर जंगल रिजर्व फारेस्ट अंतर्गत आता है। इसके अतिरिक्त 4000 हेक्टेयर जंगल खत वन, 7000 हेक्टेयर जंगल वन पंचायत और 1500 हेक्टेयर जंगल कैंट और 500 हेक्टेयर जंगल रामपुर मंडी अंतर्गत है।
डीएफओ को कार्यालय को ग्रीष्मकाल में चकराता से संचालित करने के निर्देश दिए हैं। जल्द ही इस पर कार्रवाई की जाएगी।
- पीके पात्रो, मुख्य वन संरक्षक यमुना वृत्त