बैरासकुंड (चमोली)। बैरासकुंड क्षेत्र में इन दिनों दिनभर चुनाव का शोर-शराबा है। हर पार्टी का प्रत्याशी यहां पहुंचा है, लेकिन मतदाता की ओर से किसी पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में रुझान देखने के लिए नहीं मिल रहा है। असल में यहां लड़ाई अस्पताल, विद्यालय में शिक्षकों की तैनाती और पलायन रोकने की है। भाजपा और कांग्रेस ने थराली उपचुनाव को भले ही प्रतिष्ठा का सवाल बना दिया हो, लेकिन क्षेत्र में मतदाता खामोश है।
बैरासकुंड क्षेत्र जिला मुख्यालय से 47 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां ग्राम पंचायत बैरों, सेमा, चाका, मोठा, खल्तरा, बिरवासी, भीमलता, तल्ला मटई, मल्ला मटई, सांकरी, सुगई, हितमोली, दुवणखेत, जोंकापानी, फराणखिला, गणेशपुर, क्वीराली, सिरतोली और डंगोली में करीब सात हजार मतदाता हैं। क्षेत्र में सबसे अधिक दिक्कत स्वास्थ्य सुविधाओं की है। 19 गांवों के मध्य में स्थित मटई गांव में एकमात्र आयुर्वेदिक अस्पताल है और यहां लंबे समय से चिकित्सक की नहीं है। ऐसे में ग्रामीणों को उपचार के लिए बीस किलोमीटर की लंबी दूरी तय कर नंदप्रयाग जाना पड़ता है। क्षेत्र के विद्यालयों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है। जीआईसी बैरासकुंड में 300 से अधिक छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, लेकिन महत्वपूर्ण विषयों में शिक्षकों की तैनाती नहीं है। विद्यालय में गणित विषय सृजित ही नहीं हुआ है। बैरों गांव पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। पुरुषोत्तम दत्त, महेश और शांति प्रसाद का कहना है कि नेताओं के पास पूरे क्षेत्र के विकास का कोई खाका नहीं है। साधन संपन्न लोग गांव से पलायन कर रहे हैं और जो गांव में हैं, उन्हें मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं।