ब्यूरो/अमर उजाला,ऋषिकेश।
चारधाम यात्रा में डग्गामारी संभागीय परिवहन विभाग के लिए सिरदर्द बन गई है। विभाग बाहरी प्रदेशों के डग्गामार वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करने में जुटा है, लेकिन डग्गामारी रुक नहीं पा रही है। इसकी बड़ी वजह है डग्गामार वाहनों को सीज करने की बजाए विभाग द्वारा उन्हें चालान काटकर छोड़ना है, जिस पर विभाग कई तर्क गिनाकर पल्ला झाड़ रहा है। दरअसल, संभागीय परिवहन विभाग की टीम क्षेत्र में चारधाम यात्रा के दौरान बाहरी राज्यों के वाहनों की चेकिंग अभियान चला रही है। टीम वाहनों की जांच खासकर डग्गामारी रोकने के तहत कर रही है, जिसमें अब तक 26 बाहरी वाहनों को डग्गामारी करते हुए पकड़ा जा चुका है।
विभाग ने इनमें से कुल सात वाहनों को सीज किया। इसके अलावा सात निजी कारों को व्यवसायिक इस्तेमाल के आरोप में पकड़ा गया है। खास बात यह है कि शुरुआत में डग्गामार वाहनों की सीज करने वाला महकमा अब उनका चालान कर वाहनों को छोड़ दे रहा है। परिवहन कर अधिकारी कुलवंत सिंह चौहान ने बताया कि बदरीनाथ या फिर गंगोत्री राजमार्ग पर चेकिंग के दौरान डग्गामार वाहन पकड़ में आते हैं। चालान करने पर उनका तर्क है कि संबंधित वाहन को मौके पर ही सीज करने से तत्काल उसमें सवार यात्रियों को वाहन उपलब्ध भी कराना होता है। ऐसे में कई बार तत्काल वाहन उपलब्ध नहीं हो पाता है, जिससे यात्रियों का विरोध झेलना पड़ता है। लिहाजा, डग्गामार वाहनों का चालान कर उन्हें छोड़ा जा रहा है।
किन राज्यों के वाहन हैं लिप्त
चारधाम यात्रा के शुभारंभ के बाद डग्गामार वाहनों की धरपकड़ में अभी तक उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पंजाब के सवारी वाहन संभागीय परिवहन विभाग की पकड़ में आए हैं। इनमें बस और टैंपो ट्रैवलर शामिल हैं। गौरतलब है कि संयुक्त रोटेशन यात्रा व्यवस्था समिति के पदाधिकारी हरिद्वार के ट्रैवल एजेंटों पर पंजाब और दिल्ली से टैंपो ट्रैवलर हायर कर उनसे डग्गामारी कराने का आरोप लगा चुके हैं।
सीज और चालान में क्या है अंतर
एआरटीओ डा. अनीता चमोला के मुताबिक डग्गामारी में किसी भी सवारी वाहन के पकड़े जाने पर उसे सीज किए जाने का प्रावधान है, जिसमें संबंधित सवारी वाहन की प्रत्येक सीट का 2200 रुपये के हिसाब से अर्थदंड वसूला जाता है। बताया कि चालान करने की सूरत में भी इसी प्रकार जुर्माना वसूला जाता है, लेकिन कार्रवाई के बाद वाहन का संचालन सड़क पर किया जा सकता है। बताया कि एक माह के भीतर जुर्माने की रकम जमा नहीं करने पर वाहन का रजिस्ट्रेशन निरस्त करने की कार्यवाही शुरू की जाती है।
सीज वाहन और चालान
सीज-07 (यूपी की बस-06 और पंजाब की एक)
चालान-26 (बस-12, मैक्सी कैब-07, प्राइवेट कार -07, सभी वाहन दिल्ली, पंजाब, यूपी और महाराष्ट्र के शामिल हैं)