ब्यूरो/अमर उजाला,ऋषिकश।
अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी होने के तीन साल बाद भी राज्य सरकार श्री हेमकुंड साहिब के लिए प्रस्तावित रोप-वे निर्माण तो दूर उसका सर्वे तक नहीं करा पाई है। रोप-वे नहीं बनने से हर साल लाखों सिख श्रद्धालुओं को धाम तक पहुंचने के लिए पैदल यात्रा करनी पड़ती है, जिससे खासकर बच्चों, महिलाओं, बुजुर्ग व बीमार तीर्थयात्रियों को अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। गौरतलब है कि राज्य सरकार की ओर से सिखों के पवित्र तीर्थ श्री हेमकुंड साहिब को रोप-वे से जोड़ने की योजना वर्षों से प्रस्तावित है। इसके लिए राज्य सरकार के साथ ही सेंट्रल वाइल्ड लाइफ बोर्ड, भारत सरकार से वर्ष 2015 में अनापत्ति प्रमाणपत्र एनओसी जारी हो चुकी है।
इसके लिए बाकायदा एफआरआई और केंद्रीय टीम के हेमकुंड क्षेत्र के निरीक्षण के बाद एनओसी जारी की गई। बावजूद इसके तीन साल से राज्य सरकार हेमकुंड धाम में तीर्थयात्रियों को रोप-वे की सुविधा उपलब्ध कराने की बात तो दूर इस योजना का सर्वे तक नहीं करा पाई है। श्री हेमकुंड मैनेजमेंट ट्रस्ट पूववर्ती कांग्रेस सरकार व वर्तमान भाजपा सरकार से भी कई बार गुहार लगा चुका है। श्री हेमकुंड मैनेजमेंट ट्रस्ट के उपाध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा ने बताया कि उन्होंने हेमकुंड धाम रोप-वे योजना का कार्य शुरू कराने को लेकर कुछ समय पूर्व सूबे के पर्यटन सचिव से मुलाकात की थी। उन्हें इसके लिए यूरोप से विशेषज्ञ टीम से प्रोजेक्ट का सर्वे कराने की बात कही गई है।