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भारतीय भाषा भारतीयता की पहचान : चिदानंद मुनि

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ब्यूरो/अमर उजाला,मुनिकीरेती ।
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विश्व के 15 से अधिक देशों से आए प्रवासी भारतीयों ने परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती से भेंट की। इस दौरान उन्होंने गंगा तट पर सांध्यकालीन गंगा आरती में शिरकत की और मोक्षदायिनी के दर्शन किए। इस मौके पर दल के सदस्यों से मोक्षदायिनी गंगा की निर्मलता, प्राचीन परंपराओं, संस्कारों से युवा पीढ़ी को जोड़ने आदि विषयों पर चर्चा की गई। स्वामी चिदानंद मुनि ने प्रवासी भारतीयों को अपनी जड़ों, मातृभाषा और मातृभूमि से जुड़े रहने का संदेश दिया और कहा कि भारतीय भाषा भारतीयता की पहचान है।
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उन्होंने प्रवासी भारतीयों से देश के सतत विकास के लिए स्वच्छ जल, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं लिए सहयोग का आह्वान भी किया। कहा कि भारत के पास वर्तमान समय में ऊर्जावान प्रधानमंत्री हैैं। प्रवासी भारतीय सकारात्मक ऊर्जा के साथ अपने कौशल को भी लगाएं तो देश में अप्रत्याशित परिवर्तन संभव है। इस दौरान उन्होंने स्वामी चिदानंद मुनि व साध्वी भगवती सरस्वती से आध्यात्मिक विषयों पर चर्चा की और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया।
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