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निजी भूमि पट्टे की आड़ में चल रहा खनन का खेल

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ब्यूरो/अमर उजाला,ऋषिकेश।
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यमकेश्वर प्रखंड की हेंवल घाटी के रत्तापानी क्षेत्र में निजी रजिस्टर्ड भूमि पर खनन कार्य का पट्टा आवंटन की आड़ में मानकों की अनदेखी करते हुए हेंवल नदी में अवैध खनन का कारोबार बेरोकटोक जारी है। जिस रजिस्टर्ड भूमि पर खनन पट्टे की बात यमकेश्वर तहसील प्रशासन कर रहा है, उस भूमि पर बाकायदा करीब आधा दर्जन बीच कैंप किराए पर संचालित कराकर भू स्वामी चांदी काट रहे हैं। खनन माफिया राजाजी टाइगर रिजर्व के बफर जोन में पड़ने वाली नदी में जेबीसी से खुदाई कर नियम-कायदे ताक पर रखकर दिन-रात खनन कार्य करा रहा है।
यमकेश्वर तहसील प्रशासन की मानें तो हेंवल घाटी के रत्तापानी क्षेत्र में निजी रजिस्टर्ड भूमि पर खनन कार्य के लिए एक पट्टा पौड़ी प्रशासन की ओर जारी किया गया है, लेकिन तहसील प्रशासन यह स्पष्ट नहीं कर पा रहा कि जिस भूमि पर खनन का पट्टा जारी है, खनन कार्य उस पर हो रहा है या उससे इतर किसी अन्य स्थान पर । ग्रामीणों का कहना है कि जिस निजी रजिस्टर्ड भूमि पर प्रशासन से खनन कार्य का पट्टा आवंटित कराया गया है। उस पर खनन के नाम पर कहीं भी एक फावड़ा तक नहीं चलाया गया है। उक्त भूमि पर बाकायदा चार से पांच बीच कैंप संचालित हो रहे हैं। जबकि खनन पट्टे की भूमि के नाम पर इसके समीप हेंवल नदी में जेसीबी चलाकर खनन किया जा रहा है।
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खनन नियमों का हो रहा उल्लंघन
नियमों की बात करें तो खनन पट्टे की शर्तों के अनुसार भूमि के ऊपर पड़ी सामग्री का उठान की अनुमति होती है, जबकि मौके पर पट्टे की भूमि की बजाए हेंवल नदी में और जेसीबी से बाकायदा खुदाई कर खनन सामग्री का दोहन किया जा रहा है। जबकि अनुमति में जेसीबी या अन्य किसी भी रूप में खुदाई का कोई नियम नहीं है। बावजूद इसके प्रशासन खनन पट्टा जारी करने के बाद इसकी निगरानी और सत्यापन करना ही भूल गया। सबसे अहम सवाल यह है कि पट्टाधारक दिन के समय पट्टे की भूमि पर खनन कार्य करा सकते हैं, मगर मौके पर नदी से रात के समय भी दर्जनों ट्रकों से खनन सामग्री का बेरोकटोक ढुलान हो रहा है।
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कोट्स
पौड़ी प्रशासन की ओर से रत्तापानी क्षेत्र में निजी रजिस्टर्ड भूमि पर एक पट्टा आवंटित किया गया है। निजी भूमि की अनुमति लेकर नदी में खनन कार्य किए जाने का मामला संज्ञान में नहीं है। यदि ऐसा हो रहा है तो इसे तत्काल रुकवाया जा रहा है।
- कमलेश मेहता, उपजिलाधिकारी यमकेश्वर, पौड़ी गढ़वाल।
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