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पलायन प्रभावित थल्डा और उरेगी गांव का होगा अध्ययन

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श्रीनगर। गढ़वाल विवि के पर्यावरण विज्ञान विभाग के दो छात्र पौड़ी जिले के पलायन प्रभावित गांवों में पलायन के कारण और समाधान ढूंढेंगे। छात्रों की रिपोर्ट नेशनल काउंसिल ऑफ इंस्टीट्यूट हैदराबाद भेजी जाएगी। उनकी रिपोर्ट के आधार पर काउंसिल सुधारात्मक कदम की सिफारिश करेगी।
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मानव संसाधन विकास मंत्रालय की संस्था एनसीआरआई (राष्ट्रीय ग्रामीण संस्थान परिषद) उच्च शिक्षा के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए काम करती है। इसी के तहत संस्था समय-समय पर उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षण के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों के सर्वेक्षण का जिम्मा देती है। इस साल भी एनसीआरआई ने समर इंटर्नशिप कार्यक्रम के लिए पोस्ट ग्रेजुएट कर रहे छात्र-छात्राओं से आवेदन मांगे थे। प्रोजेक्ट सिनोप्सिस के आधार पर उत्तराखंड से सिर्फ 2 छात्रों का चयन हुआ है। यह दोनों छात्र केंद्रीय गढ़वाल विवि श्रीनगर के पर्यावरण विज्ञान विभाग के छात्र हैं। चयन के बाद हाल में ही दोनों को एनसीआरआई में प्रशिक्षण दिया गया। इनमें से एमएससी चतुर्थ सेमेस्टर का छात्र आयुष सूदन घोस्ट विलेज (पलायन के कारण वीरान) घोषित हो चुके थल्डा गांव का अध्ययन करेगा। जबकि एमएससी द्वितीय सेमेस्टर का छात्र अजय नेगी पलायन के कारण खाली हो रहे गांव उरेगी का अध्ययन करेगा। दोनों छात्रों को दो माह के भीतर अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट जमा करनी होगी। इसके लिए उनको प्रतिमाह 10 हजार रुपये मिलेंगे। विभागाध्यक्ष, पर्यावरण विज्ञान विभाग प्रो. आरसी शर्मा ने बताया कि एनसीआरआई समर इंटर्नशिप मिलना बड़ी उपलब्धि है। इसमें 48 केंद्रीय विवि से सिर्फ 30 छात्रों का चयन हुआ है, जिसमें अकेले दो गढ़वाल विवि श्रीनगर से हैं।
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