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अवध में क्या मुंह ले जाऊं, कहूं क्या पूछे जब राजा.....

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पीपलकोटी। ज्योति क्लब की ओर से आयोजित रामलीला के पांचवें दिन श्रीराम को वन में छोड़कर मंत्री सुमंत उनके कहने पर अयोध्या लौट आते हैं। श्रीराम के आग्रह पर व्यथित होकर सुमंत कहते हैं कि अवध में क्या मुख ले जाऊं, कहूं क्या पूछे जब राजा..। इधर, पुत्र से बिछुड़ने के गम में राजा दशरथ अपने प्राण त्याग देते हैं।
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रामलीला मंचन का शुभारंभ राजकीय शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष कमल किशोर डिमरी ने किया। मंचन में भरत जब अपने ननिहाल से अयोध्या पहुंचते हैं तो अयोध्या का माहौल सुनसान देखकर वह सुमंत से श्रीराम के राज्याभिषेक के बारे में पूछते हैं। सुमंत भरत को श्रीराम के वनवास की खबर सुनाते हैं तो दुखी होकर भरत अपना पूरा राज्य छोड़कर अपने भाई राम से मिलने वन में पहुंचते हैं। श्रीराम भरत को वापस अयोध्या लौट जाने को कहते हैं। तब भरत श्रीराम को वचन देते हैं कि जब तक 14 वर्ष का वनवास समाप्त नहीं हो जाता, तब तक वह राजगद्दी की सेवा करते रहेंगे। इस मौके पर ललित शाह, जगदीश लाल, मयंक राणा, पंकज शाह, प्रकाश, अतुल शाह, अनुज नेगी, मनोज, भोलू, त्रिलोक, नमन व अभिषेक आदि मौजूद थे।

राजतिलक के साथ रामलीला का हुआ समापन
गोपेश्वर। गोपेश्वर में कर्मचारी रामलीला कमेटी की ओर से आयोजित रामलीला का शनिवार को श्रीराम के राजतिलक के साथ समापन हो गया है। इस दौरान श्रीराम परिवार की भव्य झांकी भी निकाली गई। श्रीराम, लक्ष्मण, सीता और राम भक्त हनुमान ने गोपीनाथ मंदिर के दर्शन भी किए। इस मौके पर रामलीला कमेटी के अध्यक्ष संतोष भंडारी, राकेश पंवार, वीरेंद्र, मोहन रावत, जानकी प्रसाद मिश्रा, विनय असवाल, आयुष नेगी, विवेक रावत व नवल नेगी आदि मौजूद थे।
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