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आत्मनिर्भर बन भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहें नगर निकाय

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श्रीनगर। गढ़वाल केंद्रीय विवि के समाजशास्त्र विभाग सभागार में उत्तराखंड में ‘नगरीकरण एवं नगर निकाय: वर्तमान दशा और दिशा’ विषय पर सेमिनार आयोजित किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि नगर पालिकाएं तेज गति से बढ़ रही जनसंख्या से उत्पन्न समस्याओं से जूझ रही हैं। नगरीय क्षेत्रों की वर्तमान स्थिति को देखते हुए प्रत्येक नगर निकाय की जिम्मेदारी बन गई है, कि व आत्मनिर्भर बनें और भविष्य की चुनौतियों के लिए अपने आप को तैयार करें।
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बृहस्पतिवार को गढ़वाल विवि के समाजशास्त्र विभाग, मानव विज्ञान विभाग व पर्वतीय विकास शोध केंद्र की संयुक्त पहल पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में मुख्य अतिथि पूर्व काबीना मंत्री मोहन सिंह रावत गांववासी ने कहा कि वर्तमान में अधिकांश नगर पालिकाएं तीव्र गति से बढ़ रही जनसंख्या से उत्पन्न समस्याओं के निराकरण की कठिन स्थिति का सामना कर रही हैं। नगरीय नियोजन व स्वच्छता की स्थिति सबसे अधिक प्रभावित हो रही हैं। अनियोजित विकास, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की समस्या के साथ साथ बेरोजगारी, श्रम का शोषण, गरीबी व आवासीय सेवाओं की कमी भी बढ़ती जा रही है। मुख्यवक्ता समाजसेवी व गढ़वाल विवि के पूर्व डीएसडब्ल्यू प्रो. जेपी पचौरी ने कहा कि देश में नगरीय क्षेत्रों की जनसंख्या, ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में दुगनी गति से बढ़ रही है। नगरों में जनसंख्या के इस बढ़ते दबाव के कारण अधिक सेवाओं, सुविधाओं व जीवन यापन के लिए बेहतर वातावरण की आवश्यकता पड़ रही है। वहीं पर्वतीय विकास शोध केंद्र के नोडल अधिकारी डा. अरविंद दरमोड़ा ने उत्तराखंड में नगरीकरण एवं नगर निकाय की वर्तमान दिशा और दशा विषय पर किए गए अध्ययन के निष्कर्ष एवं संस्तुतियों को प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में प्रो. विनोद नौटियाल, विवि मानव विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. विद्या सिंह चौहान , प्रो. इला पंत, प्रो. किरन डंगवाल, प्रो. मदन स्वरूप रावत, डा. मोहन सिंह पवंार, समीर रतूड़ी आदि ने विचार व्यक्त किए।
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