ब्यूरो/अमर उजाला/विकासनगर/त्यूनी।
किसानों पर मौसम की चौतरफा मार पड़ रही है। किसान आए दिन बरसने वाली आसमानी आफत से कराह रहे हैं। आए दिन हो रही बारिश के कारण उत्पन्न हुई नमी से फसलें कीटों को चपेट में हैं। अब रही सही कसर ओले ने पूरी कर दी है। किसानों के सामने मजबूरी यह है कि उनके पास ओले से बचाव के उपाय भी नहीं हैं।
बीती शुक्रवार और शनिवार को जौनसार बावर क्षेत्र के कई गांवों में ओलावृष्टि हुई। जिससे खासकर सेब में फ्लावरिंग की प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हुई है। बड़ी तादात में फूल गिर गए हैं। ओलों ने किसानों की कई माह की मेहनत पर पानी फेर दिया। सेब की फसल को भारी नुकसान पहुंचाने का अनुमान है। सेब ऊंचाई वाले इलाकों में किसानों की आर्थिकी का रीढ माना जाता है। कुल्हा के कुंवर सिंह और कुनैन के शमशेर आदि ने बताया कि उन्होंने खाद, कीटनाशक, तौलिया और कटिंग में करीब अब तक 60 हजार खर्च हो चुके हैं, लेकिन ओलावृष्टि ने फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। अब उत्पादन तो दूर कर्ज लौटना भी मुश्किल लग रहा है।
यहां हुई ओलावृष्टि
त्यूनी तहसील के कुल्हा, डेरसा, प्यूनल, डांगूठा, पट्यूड़, हटाड़, छजाड़, भटाड़, बुल्हाड़, उदांवा, कांडोई, भरम, कुनैन, हमराड़, झबराड़, रोटा, कोटी, गोरछा आदि क्षेत्र में जमकर ओलावृष्टि हुई। 150 गांवों में ओलावृष्टि से सेब को भारी नुकसान पहुंचा है। इसके साथ ही तापमान गिरने और मौसम में नमी बने रहने के कारण आड़ू, नाशपाती, खुमानी, पूलम, बादाम आदि की खेती भी प्रभावित हुई है।
सेब की प्रजातियां
रॉयल डिलिसियस, गोल्डन रेड, स्पर्श, रेड चीफ, सुपर स्पर्श, गोल्डन स्पर्श, आर्गेन स्पर्श, रेड चीफ स्पर्श आदि प्रजाति होती है। क्षेत्र में करीब 1000 हेक्टेयर में सेब के बागान हैं। यहां के सेब की बाजारों में भारी डिमांड है।
इन फसलों पर बारिश की मार
बारिश और ओलावृष्टि ने जौनसार बावर क्षेत्र में गेंहू, मटर, टमाटर, आलू, उड़द, हरी मिर्च, धनिया, जीरा, मैथी, मसूर, लौकी, खीरा, तौरी जैसी फसलों को भी बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया है। पछवादून क्षेत्र में भी इन फसलों को बारिश और तेज आंधी से बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है। आम और लीची की फसल भी प्रभावित हुई है।
ओले से सेब को करीब 35-40 फीसदी नुकसान का अनुमान है। किसान यूरिया का छिड़काव कर भविष्य में होने वाली ओलावृष्टि से होने वाले प्रभाव को कम कर सकते हैं। छिड़काव के बाद जो फल तैयार होगा, उसमें दाग लगने की आशंका कम होगी।
- आरपी जसोला, वरिष्ठ उद्यान प्रभारी चौसाल