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यहां डोली में नहीं घोड़ में विदा होती है दुल्हन

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देवाल। ब्लाक के वाण गांव में दुल्हन को डोली में नहीं बल्कि घोड़े में विदा किया जाता है। यहां लोग मां नंदा (पार्वती) के धर्म भाई लाटू को ईष्ट मानते हैं। नंदा को ग्रामीण डोली में ले जाते हैं, जिसके चलते यहां देवी के अलावा किसी को भी डोली में नहीं ले जाने की परंपरा है।
वाण गांव में लाटू देवता का मंदिर आज भी अपने विचित्र रहस्यों को समेटे हैं। यहां मंदिर में पुजारी आंख पर पट्टी बांधकर पूजा करता है। वहीं गांव में किसी भी बेटी को विवाह के वक्त डोली में विदा नहीं किया जाता है। मंदिर के पुजारी खीम सिंह और रमेश कुनियाल कहते हैं कि कहा जाता है कि आंखों पर बिना पट्टी बांधे मंदिर के अंदर जाने पर आंखों की रोशनी चली जाती है। ऐसे में आदिकाल से ही मंदिर के अंदर आंखों पर पट्टी बांधकर पूजा करने की परंपरा है। ब्लाक प्रमुख उर्मिला बिष्ट का कहना है कि लोग लगातार वाण को पांचवां धाम बनाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन मामले में कोई भी कोई कार्रवाई हो पा रही है।
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आज खुलेंगे लाटू मंदिर के कपाट
देवाल। ब्लाक के प्रसिद्ध लाटू मंदिर के कपाट बैसाख पूर्णिमा के अवसर पर 29 अप्रैल को खुलेंगे। सुबह पूूजा-अर्चना के बाद दोपहर एक बजे मंदिर के कपाट खोल दिए जाएंगे। इस अवसर पर यहां गढ़वाल और कुमाऊं से सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर के कपाट खुलने के दौरान इस बार पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज भी पहुंच रहे हैं।
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