ब्यूरो/अमर उजाला/विकासनगर।
आर्यन छात्र संगठन ने पेशावर कांड की 88वीं वर्षगांठ पर महा नायक वीर चंद्र सिंह गढ़वाली को श्रद्धासुमन अर्पित किए। वक्ताओं ने पेशावार विद्रोह को आजादी के मुक्ति संघर्ष में मील का पत्थर बताया।
पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष रोहित रोहिला ने कहा कि 23 अप्रैल 1930 को पेशावर में हवलदार मेजर चंद्र सिंह गढ़वाली के नेतृत्व में रॉयल गढ़वाल राइफल्स के जवानों ने भारत की आजादी के लिए लड़ने वाले निहत्थे पठानों पर गोली चलाने से मना कर दिया था। जिससे अंग्रेज पूरी तरह बौखला गए थे। उन्होंने गढ़वाली पल्टन को बैरक में भेजकर उनसे हथियार ले लिये थे। चंद्र सिंह को गिरफ्तार कर 11 वर्ष के लिए जेल में डाल दिया गया था। जेल से छूटकर वे फिर स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय हो गये। स्वतंत्रता के बाद उन्होंने राजनीति से दूर रहकर अपने क्षेत्र में ही समाजसेवा करना पसंद किया। उन्होंने कहा कि आज भी देश में कुछ ऐसी ताकतें कायम हैं जो देश को बांटना चाहते हैं। जिनके खिलाफ युवाओं को आवाज उठानी चाहिए। श्रद्धासुमन अर्पित करने वालों में नरेंद्र तोमर, रोहित, अमित पंवार, राकेश ठाकुर, विशाल साहू, सुमित सैनी, विपिन, नितिन ध्यानी, शाहरुख जैदी, दिनेश कुमार, धर्मेंद्र सिंह चौहान, जसपाल, आदेश राणा, अभिषेक राठौर आदि शामिल रहे।