ब्यूरो/अमर उजाला,ऋषिकेश।
चारधाम यात्रा में बाहरी राज्यों के यात्री वाहनों को इस बार संभागीय परिवहन विभाग ने दो महीने का ग्रीन कार्ड जारी किया है। जबकि 2017 की यात्रा के दौरान ग्रीन कार्ड केवल 15 दिनों के लिए जारी किया जाता था। विभाग की ओर से निमयों में बदलाव करने पर संयुक्त रोटेशन यात्रा व्यवस्था ने विरोध करना शुरू कर दिया है। समिति जल्द ही नियमों में संशोधन के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजने की तैयारी में है। संभागीय परिवहन विभाग चारधाम यात्रा के लिए यात्री वाहनों को ग्रीन कार्ड जारी करता है।
पूर्व में प्रदेश के यात्री वाहनों को दो माह और बाहरी राज्यों के वाहनों को 15 दिन के लिए ग्रीन कार्ड जारी किया जाता था, लेकिन इस बार विभाग ने नियम में बड़ा फेरबदल किया है। विभाग बाहरी राज्यों के वाहनों के लिए भी ग्रीन कार्ड की सीमा को दो माह कर दिया है। ऐसे में डग्गामारी की संभावनाओं को भी बल मिल रहा है।
सवाल है कि 10 दिन केे यात्रा के लिए बाहरी वाहनों को दो माह का ग्रीन कार्ड क्यों जारी किया जा रहा है? सूत्रों का दावा है कि ट्रेवल माफिया को लाभ पहुंचाने के लिए विभाग के अधिकारी नियम में फेरबदल कर रहे हैं। पूर्व रोटेशन अध्यक्ष सुधीर राय ने बताया कि डग्गामारी की वजह से छह माह तक चलने वाली यात्रा अब दो माह में सिमट कर रह गई है। उनकी इसकी वजह बाहरी राज्यों के वाहनों का दखल बताया है।
बताया कि समिति नियम को पूर्व भांति ही रखने के लिए विभाग और सरकार को प्रस्ताव भेजने की तैयारी भी कर रही है। एआरटीओ डॉ. अनीता चमोला ने बताया कि बाहरी राज्यों के यात्री वाहनों को गत वर्ष 15 दिन के लिए ग्रीन कार्ड जारी किया गया था। जबकि उत्तराखंड नियमावली 2011 में ग्रीन कार्ड की समयसीमा बाहरी राज्यों के वाहनों के लिए पहले से ही दो माह तय है। लिहाजा उस नियम के अनुसार ही दो माह के ग्रीन कार्ड जारी किए जा रहे हैं।