दारोगाओं के तबादले पर सोशल मीडिया पर वाकयुद्ध
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
एक ही जिले में निर्धारित समयावधि पूरी कर चुके दारोगाओं की तबादला सूची जारी होते ही सोशल मीडिया पर वाकयुद्ध शुरू हो गया है। तबादलों में सेटिंग का आरोप लगाते हुए सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि समय पूरा होने के बावजूद कई दारोगाओं को छोड़ दिया गया है। इस पर एडीजी (कानून व्यवस्था) ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।
डीआईजी गढ़वाल मंडल पुष्पक ज्योति ने मंगलवार को 48 दारोगाओं के तबादले की सूची जारी की थी। एक ही जिले में निर्धारित समयावधि पूरी कर चुके दारोगाओं का दूसरे जिले में तबादला किया गया है। नियमानुसार एक ही जिले में दारोगा को छह वर्ष ही तैनाती दी जा सकती है। इसे बढ़ाकर अधिकतम आठ साल किया जा सकता है। डीआईजी ने तबादला आदेश में इसी नियम का हवाला दिया था, लेकिन बुधवार को इस सूची पर सोशल मीडिया पर वाकयुद्ध होता रहा।
तबादलों में पहुंच वालों को छोड़ने और कुछ खास जिलों में पोस्टिंग देने के आरोप भी लगाए गए हैं। आरोप है कि कई दारोगा पहले ही आठ साल से ज्यादा की सेवा दे चुके हैं। उसके बावजूद उनका तबादला नहीं किया गया। वहीं कुछ पहुंच वाले दारोगा ऐसे हैं, जिन्हें देहरादून और हरिद्वार में तैनाती दी गई है। जबकि बिना पहुंच वालों को अन्य जिलों में भेजा गया है। सोशल मीडिया में कई दारोगाओं और अधिकारियों के नाम लेकर भी आरोप लगाए जा रहे हैं।
इस पर एडीजी (कानून व्यवस्था) अशोक कुमार ने बताया कि सोशल मीडिया के माध्यम से उनके पास भी यह शिकायत पहुंची है। विभाग इस मामले की जांच करेगा।
कोट :
एसएसपी हरिद्वार और देहरादून ने जिन दारोगाओं को अपरिहार्य कारणों के चलते रोकने की संस्तुति की, उन्हें सम्यक विचारोपरांत रोका गया है। हमें हरिद्वार से चमोली तक यात्रा चलाने के लिए व्यवस्था करनी है। ऐसे में हम सभी को पहाड़ नहीं भेज सकते।
- पुष्पक ज्योति, डीआईजी गढ़वाल