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पुलिस क्षेत्र तक नहीं बन पाया भराड़ीसैंण

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गैरसैंण। भले ही साल में प्रदेश की सरकार और पूरा सरकारी तंत्र गैरसैंण के भराड़ीसैंण में सत्र के लिए जुट रहा हो, लेकिन यहां मूलभूत सुविधाएं नहीं जुट पाई हैं। राजधानी की मांग करने वाला विपक्ष और ग्रीष्मकालीन का एजेंडा दिखाने वाले पक्ष के सभी नुमाइंदे भराड़ीसैंण में मूलभूत सुविधाओं को विकसित करने के लिए कोई प्रयास नहीं कर पाए।
वर्ष 2014 में गैरसैंण में विधानसभा सत्र तंबू में हुआ। इस दौरान भराड़ीसैंण में विधानसभा भवन, विधायक और अफसर आवास सहित तमाम निर्माण कार्यों की रूपरेखा तैयार हो गई थी, लेकिन भराड़ीसैंण में सत्र के आयोजन के लिए प्रशासन 100 किमी दूर गोपेश्वर से पहुंचता है। वहीं सफाई के लिए जिले की पालिकाओं और पंचायतों से पर्यावरण मित्र बुलाए जाते हैं। यहां न तो जिला है और न नगर पंचायत। सत्र के दौरान यहां भारी संख्या में लोग जुटते हैं, लेकिन कोई घटना हो जाए तो यहां पुलिस भी हाथ खड़े कर देती है। गैैैरसैंण जिला बनाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष पूरन सिंह नेगी का कहना है कि भराड़ीसैंण में संपत्तियों के रखरखाव, सफाई, बिजली, पानी, नाली आदि के लिए निकाय, जिला आदि बनाने के प्रयास करने चाहिए, जिससे सुरक्षा सहित सभी इंतजाम हो सकें। इधर एसडीएम स्मृता परमार ने कहा कि भराड़ीसैंण में पुलिस क्षेत्र सहित अन्य व्यवस्थाएं करना शासन का काम है। अभी ऐसा कोई प्रस्ताव शासन को नहीं भेजा गया है।
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54 गांवों पर एक पटवारी
गैरसैंण। भराड़ीसैंण ही नहीं बल्कि पूरे तहसील के 163 राजस्व गांवों की सुरक्षा भगवान भरोसेे हैं। यहां 163 गांवों की सुरक्षा के लिए मात्र 3 पटवारी तैनात हैं। इनमें से एक के पास राजस्व निरीक्षक और एक के पास कानून गो रजिस्ट्रार का अतिरिक्त प्रभार है।
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