गोपेश्वर। बदरीनाथ धाम के दर्सन को आने वाले श्रद्धालुओं को इस बार 37 डेंजर जोन पार करने होंगे। प्रशासन ने हाईवे पर गौचर से कंचननाला तक इतने डेंजर जोन चिह्नित किए हैं।
लामबगड़ में विगत दो वर्षों से चल रहा सुधारीकरण का कार्य अभी तक नदी के स्तर से ऊपर नहीं उठ पाया है, जिससे इस वर्ष भी तीर्थयात्रियों को लामबगड़ में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। प्रथाडीप, मैठाणा, पागलनाला और हेलंग में हाईवे की स्थिति सुधरी है, लेकिन चमोली से पीपलकोटी तक करीब दस किलोमीटर तक बदरीनाथ हाईवे तकलीफदेह बना हुआ है। यहां बजट के अभाव में एनएचआईडीसीएल (राष्ट्रीय राजमार्ग और बुनियादी ढांचा विकास निगम) की ओर से डामरीकरण के बजाय मिट्टी से गड्डे भरने का काम किया जा रहा है। बरसात में यह मिट्टी दलदल में तब्दील हो जाएगी।
जिला प्रशासन की ओर से चारधाम यात्रा की तैयारियों को लेकर कई दौर की बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं, लेकिन यात्रा पड़ावों पर अभी भी यात्रा सुविधाएं जुटाने का कार्य शुरू नहीं हो पाया है। नंदप्रयाग और जोशीमठ में पेयजल की किल्लत बनी हुई है। तीर्थयात्रा में स्थिति और भी विकट हो जाएगी। पीपलकोटी में सार्वजनिक शौचालय की व्यवस्था नहीं है।
हेलंग में पैनी मोड़ हाईवे पर बड़ा भूस्खलन जोन है। यहां बरसात में हाईवे सुचारु यातायात में दिक्कतें पैदा कर देता है। वर्ष 2013 में यहां भूस्खलन से बदरीनाथ और हेमकुंड साहिब की तीर्थयात्रा प्रभावित हुई थी। तब से अब तक यहां कोई सुधारीकरण कार्य नहीं हुआ है। हालांकि तीर्थयात्रा को सुगम बनाने के लिए बीआरओ की ओर से यहां डामरीकरण का कार्य किया गया है। इसके अलावा हाईवे पर झड़कुला में तीन अंधे मोड़ हैं। यहां भी चट्टानी भाग होने के कारण हाईवे संकरा है।
डीएम आशीष जोशी का कहना है कि बदरीनाथ हाईवे पर 37 डेंजर जोन चिह्नित किए गए हैं। डेंजर जोन पर बीआरओ और एनएच के अधिकारियों को पर्याप्त मशीनें और मैन पावर की तैनाती के निर्देश दिए गए हैं।