श्रीनगर। देवभूमि विचार मंच एवं गढ़वाल विवि ने संयुक्त रूप से राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया। औपनिवेशिक मानसिकता से भारतीय जनमानस को मुक्ति विषय पर गोष्ठी हुई, जिसमें वक्ताओं ने कहा कि पहाड़ बनाम मैदान की विचारधारा समाप्त की जानी चाहिए।
शुक्रवार को चौरास परिसर में राष्ट्रीय गोष्ठी के मुख्य वक्ता जेएनयू के प्रो. मकरंद परांजपे ने कहा कि औपनिवेशिकता हमारे अंदर है। इसे हम ही समाप्त कर सकते हैं। इसके लिए हमें अपनी सोच में परिवर्तन करना होगा। मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान में 85 फीसदी से अधिक लोग औपनिवेशिक मानसिकता के हैं। हमें अपनी सोच में परिवर्तन लाना होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल ने कहा कि शब्दों में सरलीकरण होना चाहिए। तभी औपनिवेशिकता से बचा जा सकता है। पहाड़ बनाम मैदान की विचारधारा भी समाप्त की जानी चाहिए। देवभूमि विचार मंच के प्रदेश अध्यक्ष डा. चैतन्य भंडारी ने गोष्ठी के उद्देश्य के बारे में बताया। संचालन डा. एसएस बिष्ट ने किया। कार्यक्रम में डीएसडब्ल्यू प्रो. सुरेखा डंगवाल, प्रो. डीआर पुरोहित, प्रो. सीएस बागड़ी, प्रो. एसएस नेगी, मोहन नैथानी, डा. सर्वेश उनियाल, महेश डोभाल आदि मौजूद थे।
कालेजों में हो पत्रकारिता एवं जनसंचार विषय
श्रीनगर। पत्रकारिता एवं जनसंचार केंद्र के निदेशक प्रो. एआर डंगवाल ने विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल से विषय को उत्तराखंड के राजकीय महाविद्यालयों में संचालित करने की मांग की है। प्रो. डंगवाल ने विधानसभा अध्यक्ष को ज्ञापन सौंप शीघ्र समस्या के निराकरण की मांग की।