कर्णप्रयाग। भगवान बदरीविशाल के महाभिषेक में प्रयोग किए जाने वाले तिल के तेल को लेकर गाड़ू घड़ा कलश यात्रा आज (शनिवार) शुरू होगी। कर्णप्रयाग के डिम्मर गांव से डिमरी पुजारी शुक्रवार को राजदरबार नरेंद्रनगर (टिहरी) के लिए रवाना हुए। शनिवार शाम यात्रा ऋषिकेश के चेला चैतराम धर्मशाला पहुंचेगी।
नरेंद्रनगर रवाना होने से पूर्व श्री डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत के अध्यक्ष राकेश कुमार डिमरी और महासचिव राजेंद्र डिमरी ने बताया कि शनिवार सात अप्रैल को नरेंद्रनगर राज दरबार में राज पुरोहितों और डिमरी पुजारियों की ओर से वैदिक मंत्रोच्चारों के साथ गाड़ू घड़ा तेल कलश की पूजा अर्चना की जाएगी। इस दौरान देवताओं का आवाह्न कर 56 प्रकार के भोग अर्पित किए जाएंगे। शनिवार शाम को गाड़ू घड़ा तेल कलश शोभायात्रा भजन-कीर्तन के साथ रात्रि प्रवास के लिए ऋषिकेश चेला चैतराम धर्मशाला पहुंचेगी। 10 अप्रैल को यात्रा उमा देवी मंदिर कर्णप्रयाग में रात्रि विश्राम करेगी और 11 अप्रैल से 26 अप्रैल तक डिम्मर के लक्ष्मी नारायण मंदिर में प्रवास करेगी। इस दौरान यहां यात्रा के साथ-साथ भगवान लक्ष्मीनारायण की भी पूजा की जाएगी। इसके बाद लंगासू, नंदप्रयाग, पीपलकोटी, जोशीमठ होते हुए यात्रा 30 अप्रैल को तड़के 4.30 बजे भगवान बदरी विशाल के कपाटोद्घाटन के साथ मंदिर के गर्भ गृह में पहुंचेगी। यहां परंपराओं के साथ तेल कलश को प्रतिष्ठापित किया जाएगा।
गाड़ू घड़ा तेल कलश यात्रा कार्यक्रम
7 अप्रैल-नरेंद्रनगर से ऋषिकेश बीकेटीसी धर्मशाला।
8 अप्रैल- बीकेटीसी धर्मशाला से ऋषिकेश शत्रुघ्न मंदिर।
9 अप्रैल-ऋषिकेश से डालमियां धर्मशाला श्रीनगर।
10 अप्रैल-श्रीनगर से कर्णप्रयाग उमा देवी मंदिर।
11 अप्रैल- उमा देवी मंदिर से डिम्मर लक्ष्मी नारायण मंदिर। (यात्रा 26 अप्रैल तक यहां प्रवास करेगी)।
27 अप्रैल-डिम्मर से जोशीमठ नर्सिंग मंदिर।
28 अप्रैल-जोशीमठ से पांडुुकेश्वर योगध्यान मंदिर।
29 अप्रैल-पांडुकेश्वर से बदरीनाथ मंदिर।