ब्यूरो/अमर उजाला/साहिया।
कालसी प्रखंड के गबेला गांव में इन दिनों पानी का संकट बना हुआ है। नलों में बूंद-बूंद पानी आ रहा है। लोगों को रोजमर्रा के काम निपटाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। 52 परिवारों की दिनचर्या पूरी तरह से गड़बड़ा गई है।
गबेला गांव के लिए हाजा खड्ड से पेयजल लाइन बिछाई गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि एक साल पूर्व इसी जलस्रोत से दोधा गांव के लिए भी प्लास्टिक की लाइन बिछा दी गई। इसके चलते अब गबेला गांव में पानी का संकट खड़ा होने लगा है। ग्रामीणों की दिनचर्या पूरी तरह से गड़बड़ा गई है। स्थानीय ग्रामीण आनंद सिंह, भगतराम शर्मा, प्रेम, सरदार दत्त, कपिल शर्मा आदि का कहना है कि पेयजल संकट के बीच ग्रामीणों को एक किमी दूर स्थित हैंडपंप से पानी ढोना पड़ रहा है। कपड़े और बर्तन धोने के लिए भी ग्रामीणों को खड्ड की दौड़ लगानी पड़ रही है। मवेशियों को भी पानी पिलाने के लिए खड्ड पर जाना पड़ रहा है। जल संस्थान के सहायक अभियंता एसके श्रीवास्तव ने बताया कि मामले में जेई से रिपोर्ट मांगी जाएगी।
सात दशक बाद भी पेयजल लाइन नहीं
चकराता(ब्यूरो)। आजादी के सात दशक बाद भी ग्राम सभा ठाणा के पयात्रा गांव में पानी की लाइन नहीं बिछ सकी है। लोग पानी को तरस रहे हैं। लोगों को एक किमी दूर खड्ड से पानी ढोना पड़ता है। गर्मियां बढ़ने के साथ ही खड्ड पर पानी का जल स्तर कम हो जाता है। इससे भीषण पेयजल संकट खड़ा हो जाता है। स्थानीय ग्रामीण गज्जू दास, सतीश, शेरू, दिनेश, विनोद, खीमा, धनु आदि का कहना है कि गांव तक पेयजल लाइन बिछाने की मांग पर कई बार ग्राम सभा के माध्यम से प्रदेश सरकार को ज्ञापन भेजा जा चुका है। लेकिन हर बार उनकी मांग को अनसुना कर दिया जाता है। पेयजल निगम पुरोड़ी के अधिशासी अभियंता सोहित बरनवाल ने बताया कि ग्रामीणों की ओर से लिखित प्रस्ताव मिलने पर ही इस संबंध में कार्रवाई संभव है।