फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

महिला का डायलिसिस करना जरूरी था

विज्ञापन
विज्ञापन
ब्यूरो /अमर उजाला/देहरादून।
विज्ञापन

इलाज में लापरवाही से महिला वकील श्वेता की मौत की शिकायत पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से गठित टीम ने सीएमओ को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। सीएमओ का कहना है कि महिला का डायलिसिस किया जाना जरूरी था। इलाज में किसी तरह की लापरवाही सामने नहीं आयी है।
बता दें महिला वकील श्वेता की मौत पर के परिजनों ने ईसी रोड स्थित अस्पताल के डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया था। इसके बाद सीएमओ डॉ. वाईएस थपलियाल ने अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. केके सिंह, दून अस्पताल के वरिष्ठ नेफ्रोलाजिस्ट डॉ. हरीश बसेरा, कोरोनेशन अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. वीएस चौहान एवं राज्य मानसिक स्वास्थ्य संस्था सेलाकुई के वरिष्ठ एनेस्थेटिस्ट डॉ. खगेंद्र सिंह को प्रकरण की जांच सौंपी थी। टीम ने अब अपनी रिपोर्ट सीएमओ को सौंप दी है। जांच रिपोर्ट के अनुसार मरीज (महिला वकील) का सीबीसी, एसजीपीटी की जांच कराई गई। जांच में उसका लीवर व किडनी सही ढंग से काम नहीं कर रही थी। पेशाब न होने, मेटाबॉलिक एसिडोसिस होने, सांस लेने में दिक्कत होने पर उसका डायलिसिस कराया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

परिजनों ने लगाया था यह आरोप
डीएवी कॉलेज रोड निवासी अधिवक्ता श्वेता के परिजनों ने ईसी रोड स्थित एसके मेमोरियल अस्पताल में इलाज के दौरान लापरवाही से मौत का आरोप लगाया था। परिजनों का कहना था कि उल्टी, दस्त और बुखार की शिकायत पर उसे तीन जनवरी को ओपीडी में दिखाया गया, लेकिन तबीयत ठीक न होने पर परिजन उसे फिर से अस्पताल ले गए। जहां डॉक्टरों ने उसे तीन दिन तक अस्पताल में भर्ती रखा। छह जनवरी को डॉक्टरों ने कहा कि श्वेता का डायलिसिस करना होगा। इस पर परिजनों की ओर से डायलिसिस के लिए मना किया गया। इसके बावजूद श्वेता का डायलिसिस किया गया इससे तबीयत अधिक खराब हो गई और उसकी मौत हो गई।
-----------
हम मुख्य चिकित्साधिकारी की जांच रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हैं। इस मामले को हम मेडिकल काउंसिल में लेकर जा रहे हैं। प्रकरण की सीबीआई से जांच होनी चाहिए।
-संदीप चौधरी, श्वेता के बडे़ भाई
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें