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प्रवेश द्वार पर ही अव्यवस्थाएं

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ब्यूरो/ऋषिकेश। आसन्न चारधाम यात्रा में इस साल भी श्रद्धालुओं को चारों धामों के प्रवेश द्वार पर अव्यवस्थाओं व दुश्वारियों से जूझना पड़ेगा। वजह यात्रा के सुचारु संचालन के लिए तीर्थनगरी में करोड़ों की लागत से बने बस ट्रांजिट कंपाउंड (बीटीसी) में इसके लिए अभी तक कोई व्यवस्था नहीं जुटाना है। यहां सब कुछ बेपटरी चल रहा है, जिसके कारण यात्रा व दर्शन के लिए देश-दुनिया से जुटने वाले तीर्थाटकों की इस साल भी फजीहत तय है।
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यात्रा प्रारंभ होने में अब 18 दिन शेष रह गए हैं, बस ट्रांजिट कंपाउंड में यात्रा के नाम पर व्यवस्थाओं का कहीं कोई अता पता नहीं है। यहां बसों के लिए बनाए गए प्लेटफार्म पर अभी तक पार्किंग आवंटित नहीं हो पाई हैं। लिहाजा विभिन्न निजी परिवहन कंपनियों के वाहनों को चंद्रभागा पर बने चौदहबीघा ब्रिज, चंद्रभागा नदी और बीटीसी के प्रवेश व निकासी मार्गों पर पार्क किया जा रहा है। इसकी अहम वजह परिसर में जगह-जगह पसरे अतिक्रमण को अभी तक नहीं हटाया जाना है। नगर निकाय, पर्यटन विभाग व जिला प्रशासन के अधिकारी इस सबसे बाखबर हैं, मगर यहां व्यवस्थाएं जुटाने को कोई तैयार नहीं। इतना ही नहीं सूबे के मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष भी बीते साल चारधाम यात्रा के शुभारंभ अवसर पर इस अव्यवस्था को करीब से देख चुके हैं।

बीटीसी पर अनाधिकृत को जगह, अधिकृत हुए बाहर
तीर्थनगरी में चारधाम यात्रा के सुचारु संचालन के लिए बने बीटीसी में आज तक निजी परिवहन कंपनियों की बसों को अधिकृत तौर पर पार्किंग आवंटित नहीं हो पाई हैं। लिहाजा बसों के लिए यहां जगह नहीं बची है। जबकि बस ट्रांजिट कंपाउंड में कई ऐसे बाहरी वाहनों की बेरोकटोक एंट्री व अनाधिकृत पार्किंग बनी हैं जिनका बीटीसी कंपाउंड से दूर तक कोई वास्ता नहीं है। मसलन पूरे परिसर में माल वाहक वाहन ट्रक, टैंकर, ट्रैक्टर ट्रालियों को पार्क किया जा रहा है। इतना ही नहीं कंक्रीट मिक्सर, बुलडोजर, जेसीबी आदि भी बीटीसी में खड़ी की जा रही हैं। इसके अलावा कैंपस में ऑटो रिक्शा, प्राइवेट टैक्सी और स्कूल बसों को पार्क करने की भी कोई मनाही नहीं।
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प्रवेश व निकासी मार्गों पर बाहर का ट्रैफिक
बीटीसी के प्रवेश व निकासी मार्गों पर बाहरी वाहनों का बेरोकटोक संचालन हो रहा है। इन सड़कों पर माल वाहक, रेत बजरी व सरिया ढोने वाले वाहन और अन्य कई ऐसे वाहन चल रहे हैं, जिनका बीटीसी कैंपस से कोई वास्ता नहीं है। इन वाहनों के दबाव के कारण अक्सर परिसर में जाम की स्थिति बनी रहती है। मगर स्थानीय प्रशासन, संभागीय परिवहन विभाग, पुलिस आदि जिम्मेदार महकमे अनाधिकृत तौर पर बीटीसी मार्गों पर संचालित वाहनों को रोकने को लेकर कुछ भी करने को तैयार नहीं दिखते।

व्यवस्थाओं की नहीं वोट साधने की चिंता
केंद्र सरकार की 12 करोड़ की निधि से निर्मित बस ट्रांजिट कंपाउंड को कुछ सफेदपोशों के वोट बैंक साधने का जरिया बना दिया है, जिससे कैंपस अव्यवस्थाओं का शिकार है। इस समस्या के समाधान के लिए जिम्मेदार अफसर और विभाग भी लापरवाह बने हुए हैं। अफसरों की लापरवाही का आलम यह है कि अव्यवस्था से पूर्व व वर्तमान जिलाधिकारी, मुख्य सचिव, पर्यटन सचिव रूबरू हो चुके हैं। मगर किसी ने यहां व्यवस्थाएं बहाल करने की जहमत नहीं उठाई।

कोट्स
बीटीसी के निरीक्षण के दौरान 19 मार्च को खोखा व्यापारियों को खुद ही खोखे हटाने के लिए कहा गया था। इस बाबत उन्हें दो बार नोटिस भी जारी किए गए हैं। 15 दिन के भीतर वह खोखे नहीं हटाते हैं, तो प्रशासन सख्ती के साथ कैंपस से खोखे हटाएगा।
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हरक सिंह रावत, अपर आयुक्त, गढ़वाल।
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