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ज्ञान से मिटता है अहंकार: श्रीश्री

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ब्यूरो/ऋषिकेश। आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने कहा कि ज्ञान से अहंकार को मिटाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रेम के आगे भी अहंकार नहीं टिकता है। मगर जीवन में अहंकार का होना भी जरूरी है, बशर्ते उसका रचनात्मक इस्तेमाल जीवन को बेहतर बनाने के लिए किया जाए। शनिवार रात मुनिकीरेती स्थित शीशमझाड़ी दयानंदनगर में श्री श्री आश्रम में आयोजित प्रवचन सभा में उन्होंने श्रद्धालुओं और अनुयायियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि तिल के तेल का दिया जलाने से कुछ भी हासिल नहीं होने वाला है। मन की शांति के लिए ध्यान, कीर्तन और भजन की आवश्यकता है।
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श्रीश्री ने कहा कि समय का असर आप पर नहीं होना चाहिए, बल्कि समय पर आपका प्रभाव पड़ना चाहिए। उन्होंने इस पर भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराम का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराम हजारों साल पहले थे, मगर उनका असर समय पर आज भी मौजूद है। कहा कि भगवान शिव के नाम के जाप से समय बदल जाता है, महादेव का नाम जपने से शनिदेव का असर भी समाप्त हो जाता है और शिव आपको समय के असर से भी सुरक्षा देते हैं।
प्रवचन कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से आए उनके अनुयायियों ने मन की शंकाओं को भी श्री श्री रविशंकर से साझा किया, जिस पर श्री श्री ने उनकी शंकाओं को दूर किया। इससे पूर्व आश्रम में भजन संध्या का आयोजन किया गया। जिसमें भगवान शिव और मां भगवती आदि से जुड़ी आध्यात्मिक प्रस्तुतियों पर अनुयायी झूमते नजर आए।
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