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मांगों को लेकर वनकर्मी बेमियादी हड़ताल पर

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ब्यूरो/अमर उजाला/विकासनगर/कालसी।
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दो सूत्रीय मांगों को लेकर वन बीट कर्मचारी मंगलवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। फायर सीजन में कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने से जंगलों की सुरक्षा भगवान भरोसे हो कर रह गई है।
मालूम हो कि पछवादून और जौनसार बावर का एक बड़ा भू-भाग पूरी तरह से वनाच्छादित है। इनकी सुरक्षा का जिम्मा वन बीट कर्मियों के कंधे पर है। भूमि संरक्षण वन प्रभाग कालसी में 70 और चकराता वन प्रभाग में 53 वन बीट कर्मचारी कार्यरत हैं। यह बीट कर्मचारी विभाग की रीढ़ हैं। इनके पास अलग-अलग रेंज अंतर्गत बीटों की रखवाली का जिम्मा है। फायर सीजन को देखते वन विभाग ने सभी बीट कर्मियों को अपनी बीट पर रहने के निर्देश जारी किए हैं, लेकिन अब कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं तो इन बीटों में जंगलों की सुरक्षा रामभरोस गई है। ऐसे में फायर सीजन में यदि कहीं पर आगजनी की घटनाएं होती हैं तो विभाग को आग बुझाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ सकती है। उधर, चकराता वन प्रभाग के डीएफओ दीप चंद आर्य और भूमि संरक्षण वन प्रभाग कालसी के डीएफओ सुरेंद्र कुमार ने बताया कि वन बीट कर्मियों की हड़ताल के मद्देनजर वन दरोगाओं और रेंजाधिकारियों को सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।
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तस्करी पर लगाम लगाना भी होगा मुश्किल
कालसी भूमि संरक्षण वन प्रभाग की नौ में से तीन रेंज लांघा, चौहड़पुर और तिमली रेंज रिजर्व फॉरेस्ट में आती है। अंतरराज्यीय सीमा होने के कारण यह इलाके अवैध पातन और अग्नि की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। वहीं चकराता छह रेंज अति संवेदनशील हैं। इन इलाकों में बड़े पैमाने पर बेशकीमती लकड़ी, जड़ी-बूटी और वन्य जीव मिलते हैं। ऐसे में वन बीट कर्मियों के हड़ताल पर चले जाने से विभाग के लिए इन बेशकीमती वन उपज की तस्करी पर लगाम लगाना मुश्किल हो जाएगा।

इन मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं कर्मचारी
वन दरोगा के पदों पर सीधी भर्ती को समाप्त करने और वन दरोगा के पद पर पदोन्नति हेतु 10 वर्ष की अवधि की बाध्यता तत्काल खत्म करने की मांग पर वन बीट कर्मी आंदोलनरत हैं।
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यहां रामभरोसे सुरक्षा
कर्मियों के हड़ताल पर चले जाने से कालसी वन प्रभाग की लांघा, चौहड़पुर, तिमली, कालसी-1, कालसी-2, चकराता, चुरानी, बरोंथा, क्वानू और चकराता वन प्रभाग की रिवर, कनासर, रिखनाड़, देवघार, बावर, मोल्टा रेंज अंतर्गत जंगलों की सुरक्षा रामभरोस हो कर रह गई है।
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