ब्यूरो/ऋषिकेश। समाज में घटती कन्याओं का असर वासंतिक नवरात्र की सप्तमी, अष्टमी व नवमी को साफ देखने को मिला। नवरात्र पाठ पर देवी को प्रसन्न करने और पूजन के लिए कन्याओं को मोहल्लों में खोजना पड़ा। स्थिति यह थी कि कई लोगों को एक घर पर जीम रही कन्याओं को अपने यहां जिमाने के लिए इंतजार करना पड़ा। ऐसे में एक-एक कन्या को नवरात्र भोज के लिए चार से पांच और कइयों को इससे अधिक घरों का आमंत्रण स्वीकारना पड़ा।
नवरात्र पर जीमने के लिए बुलाई गई आरुषि, शीतल, ईशू, संध्या, आयुषी आदि कन्याओं ने बताया कि उन्हें नवरात्र सप्तमी, अष्टमी व नवमी तिथि पर कई घरों से बुलावा आया। श्यामपुर निवासी सुभद्रा कंडवाल, रायवाला की लक्ष्मी देवी, मुनिकीरेती के चौदहबीघा निवासी निर्मला बिजल्वाण का कहना है कि उन्हें जिमाने के लिए कन्याओं को एकत्रित करने को कई घरों में दस्तक देनी पड़ी। इसके बाद ही बामुश्किल जिमाने के लिए नौ कन्याएं मिल पाई। उनमें भी कई कन्याएं दूसरे नवरात्र अनुष्ठानों में भोज कर चुकी थीं, लिहाजा उन्हें प्रसाद और दक्षिणा देकर औपचारिकता पूरी करनी पड़ी।
क्या कहते हैं लोग
वास्तव में यह सच है कि सामाजिक विसंगति के कारण महिलाओं का अनुपात कम हो रहा है। यह आने वाले समय के लिए खतरनाक संकेत है। इसके लिए कन्या भ्रुण हत्या को रोकना जरूरी हो गया है। वैश्विक परिप्रेक्ष्य में यह अच्छा संकेत नहीं है।
- पंडित जयकृष्ण सेमवाल, ज्योतिषाचार्य।
वैसे तो जो लोग नवरात्र में मां शक्ति की आराधना के साथ कन्याओं को पूजते हैं, वह कन्याओं से स्नेह रखते हैं। फिर भी हमें एक ओर देवी पूजन और दूसरी ओर देवी स्वरूपा कन्याओं की गर्भ में हत्या की दोहरी मानसिकता छोड़नी ही होगी। तभी नारी का सही मायने में सम्मान संभव है।
- डा. जीएस रावत, फिजिशियन।