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सेना के साथ मिलकर चलाया जाएगा श्रीनगर मेडिकल कॉलेज

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देहरादून। श्रीनगर मेडिकल कालेज के संचालन को लेकर स्थिति साफ हो गई है। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को देहरादून में इस बात लेकर अपनी सहमति दे दी है। उन्होंने कहा है कि पर्वतीय क्षेत्र में रहने वाले पूर्व सैनिकों और उनको परिवार की सेवा करने से रक्षा मंत्रालय पीछे नहीं हटा है। उन्होंने वादा किया रक्षा मंत्रालय इसकी मंजूरी प्रदान कर देगा।
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सीएम आवास पर आईएमए और एनडीए कैडेट्स के सम्मान समारोह के अवसर पर उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने उनसे अस्पताल के बारे में बात की है। इसके बाद उन्होंने चुटकी लेने के अंदाज में कहा कि इससे पहले एक छोटा सा षडयंत्र रचा गया है। मुख्यमंत्री आर्मी चीफ को वहां (श्रीनगर) ले जाने के लिए पहले से तैयार कर लिया है। चीफ के साथ होने के बाद अब मेरे पास हां कहने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं है। फिर कहा कि धरती के पुत्र हैं इसलिए आर्मी चीफ ने सीएम के साथ हाथ मिला है। इसके बाद गंभीर होते हुए उन्होंने कहा कि इसमें कोई बुराई नहीं है। रक्षा मंत्रालय इसकी मंजूरी प्रदान कर देगा। वहीं मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि इस मुद्दे पर हमारी रक्षा मंत्री से बातचीत हुई है। सेना की एक टीम शनिवार से वहां पर है। उत्तराखंड सैन्य बाहुल्य प्रदेश है, अगर पूर्व सैनिकों के परिवार को नजदीक में ही अच्छी चिकित्सा सुविधा मिल जाती है तो यह अच्छी बात है।

फोटो सहित

आर्मी चीफ बिपिन रावत ने किया कालेज व बेस अस्पताल का निरीक्षण
श्रीनगर। थल सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत ने रविवार शाम देहरादून से श्रीनगर पहुंचकर अधिकारियों के साथ बेस अस्पताल केे विभिन्न वार्डों का निरीक्षण किया। इसके बाद वह मेडिकल कालेज पहुंचे। कालेज में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत पहले से मौजूद थे। यहां लेक्चर हाल में मुख्यमंत्री और आर्मी चीफ ने अधिकारियों और संकाय सदस्यों के साथ मुलाकात की। संक्षिप्त कार्यक्रम में थल सेनाध्यक्ष ने कहा कि अस्पताल ठीक-ठाक है। यदि इसमें कुछ और सुधार किए जाएं, तो यह बेहतर बनाया जा सकता है। कुछ देर की मीटिंग के बाद आर्मी चीफ सीधे रवाना हो गए।
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बैठक के बाद पत्रकारों वार्ता में मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 10 माह पूर्व आर्मी चीफ और प्रधानमंत्री के रक्षा सलाहकार के साथ मुलाकात हुई थी, जिसमें यह चर्चा हुई थी कि किस प्रकार उत्तराखंड में बेहतर सुविधाएं दी जाए। उत्तराखंड सैनिक बाहुल्य क्षेत्र है। आर्मी मेडिकल कालेज पुणे की तर्ज पर यदि मेडिकल कालेज श्रीनगर को चलाए जाए, तो सभी को लाभ मिलेगा, क्योंकि सेना के पास ऐसा संस्थान होना चाहिए, जहां हाई एल्टीट्यूड की बीमारियों का इलाज हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें खुशी है कि आज देहरादून में रक्षा मंत्री ने इसकी सहमति भी दे दी है। सेना को कालेज कब सौंपा जाएगा, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि अभी थोड़ा समय लगेगा। कालेज में कार्यरत संविदा फैकल्टी और अस्थायी कर्मचारियों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि किसी का भी अहित नहीं होने दिया जाएगा। इस मौके पर राज्य मंत्री डा. धन सिंह रावत, मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह आदि मौजूद थे।

अस्थायी कर्मचारी परेशान
श्रीनगर। सेना अधिकारियों और मुख्यमंत्री के जाने के बाद अस्थायी कर्मचारियों ने प्राचार्य से मुलाकात की। कर्मचारियों का कहना था कि वह वर्षों से संस्थान में सेवाएं दे रहे हैं। कालेज को सेना के हवाले किया जा रहा है, लेकिन उनका क्या होगा, यह स्पष्ट नहीं किया जा रहा है। उन्होंने रोष जताया कि यदि उनका नियमितीकरण हो जाता, तो उनको ऐसा परेशान न होना पड़ता।

जनता की इच्छा नहीं हुई पूरी
श्रीनगर। थल सेनाध्यक्ष बनने के बाद पहली बार गृह जनपद पौड़ी के श्रीनगर पहुंचे बिपिन रावत से मिलने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे, लेकिन सेना के कड़े सुरक्षा इंतजाम होने से उन्हें निराश लौटना पड़ा।

सड़क मार्ग से गैरसैंण रवाना हुए सीएम
श्रीनगर। मौसम खराब होने के कारण मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत को सड़क मार्ग से गैरसैंण के लिए निकलना पड़ा। राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में कार्यक्रम संपन्न होने के बाद मुख्यमंत्री, राज्य मंत्री डा. धन सिंह रावत के साथ जीवीके हेलीपैड पहुंचे, लेकिन तेज हवा चलने से पायलट ने सुरक्षा को देखते हुए उड़ान में असमर्थता जताई। इसके बाद सीएम कार से गैरसैंण के लिए रवाना हो गए। ब्यूरो
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