भराड़ीसैंण। प्रदेश में राजकीय उद्यानों की हालत खराब है। राज्य के 13 जिलों में संचालित 93 राजकीय उद्यानों की महज 33.5 प्रतिशत भूमि ही प्रयोग में लाई जा रही है, जबकि 66.5 प्रतिशत भूमि बंजर पड़ी है। पौड़ी और अल्मोड़ा समेत आठ जिलों में स्थिति खराब है।
विधानसभा में विधायक प्रीतम सिंह द्वारा पूछे गए सवाल पर राजकीय उद्यानों की चिंताजनक स्थिति सामने आई है। हालत यह है कि मैदानी जिलों को छोड़कर पहाड़ के पिथौरागढ़, चंपावत और रुद्रप्रयाग में उद्यानों की स्थिति कुछ ठीक है। मैदानी जिले ऊधमसिंह नगर में जहां 79 प्रतिशत भूमि को उपयोग किया जा रहा है, वहीं हरिद्वार में 59 प्रतिशत भूमि में उद्यान की नर्सरी सहित अन्य काम हो रहे हैं, जबकि पिथौरागढ़ और चंपावत में 60 और रुद्रप्रयाग में 50 प्रतिशत उद्यानों की भूमि पर काम हो रहा है। सबसे खराब हालत पौड़ी जिले की है। यहां महज 10 प्रतिशत भूमि का उपयोग ही विभाग कर पा रहा है, जबकि अल्मोड़ा में 11, उत्तरकाशी में 21, चमोली में 22, देहरादून में 23, टिहरी में 36, बागेश्वर में 37 और नैनीताल में राजकीय उद्यान की केवल 45 प्रतिशत भूमि का उपयोग विभाग कर पा रहा है। हालांकि उद्यान मंत्री सुबोध उनियाल का कहना है कि इन राजकीय उद्यानों में सब्जी, फलदार पौधे और बीज उत्पादन का काम किया जा रहा है।
जिला राजकीय उद्यान की कुल भूमि (हेक्टेयर में) उपयोग में लाई जा रही भूमि (हेक्टेयर में)
ऊधमसिंह नगर 44.77 35.02
नैनीताल 188.01 84.51
अल्मोड़ा 302.10 32.40
बागेश्वर 30.05 11.95
पिथौरागढ़ 116.50 70.19
चंपावत 44.14 26.42
हरिद्वार 5.13 4.63
देहरादून 55.85 23.38
टिहरी 70.56 25.24
पौड़ी 39.30 3.30
चमोली 77.57 17.84
रूद्रप्रयाग 10.25 5.20
उत्तरकाशी 73.40 15.60
राजकीय उद्यानों के विकास को सेंटर फॉर एक्सीलेंस : सीएम
राजकीय उद्यानों को विकसित करने के लिए सेंटर फॉर एक्सीलेंस की योजना प्रदेश सरकार शुरू कर रही है, जिसकी शुरूआत गैरसैंण के हरगढ़ से हो रही है। यहां 500 नाली भूमि में 10 करोड़ की लागत से सेंटर फॉर एक्सीलेंस शुरू हो रहा है, जिसके बाद भी राजकीय उद्यानों की भूमि को विकसित किया जाएगा।