भराड़ीसैंण (गैरसैंण)। यहां बुधवार को भी आंदोलनकारियों और पुलिस कर्मियों में जंगल-जंगल, सड़क-सड़क का खेल चलता रहा। आंदोलनकारियों को काबू करने में पुलिस को कंटीली झाड़ियों, पगडंडियों के सहारे चढ़ना और उतरना पड़ा।
मंगलवार को दिवालीखाल से पैदल जंगल के रास्ते विधानसभा परिसर पहुंचे आंदोलनकारियों को काबू करने के लिए पुलिस ने जंगल के रास्तों से जाने की रणनीति अपनाई। भराड़ीसैंण की तलहटी में बसे गांव परवाड़ी की महिला प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए महिला पुलिस जवान सड़क से करीब एक किमी नीचे गांव की ओर चल पड़ी। यहां महिलाएं कमर में रस्सी और हाथ में दरांती लेकर तैयार थी। महिलाओंका कहना था कि वे प्रदर्शन के लिए नहीं बल्कि घास के लिए जंगल जा रही हैं, लेकिन महिला जवान नहीं मानीं। महिलाएं जंगल की ओर चल पड़ी और पुलिस महिलाओं के पीछे। जंगल में करीब दो किमी के उतार-चढ़ाव के बाद पुलिस के साथ महिलाएं भी सड़क पर पहुंची। दूसरी ओर सड़कों पर भी प्रदर्शनकारियों की तलाश में पुलिस घूमती रही। ब्यूरो
सुरक्षा कर्मियों के लिए नहीं बैरक
भराड़ीसैंण (गैरसैंण)। सत्र के दौरान ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा कर्मियों में नाराजगी दिखी। नाम नहीं बताने की शर्त पर पुलिस कर्मियों ने कहा कि हर साल भराड़ीसैंण में सत्र का आयोजन होता है, लेकिन यहां ड्यूटी पर आने वाले पुलिस कर्मियों के रहने के लिए बैरक तक नहीं है। कई पुलिस कर्मी खुले आसमान में रह रहे हैं। पुलिस कर्मियों ने कहा कि भराड़ीसैंण के आसपास सुरक्षा कर्मियों के लिए एक बैरक का निर्माण होना चाहिए। ब्यूरो