श्रीनगर। मेरा नाम कर्नल सूरत सिंह है। क्या आपने कभी मौत का सामना किया है। शायद नहीं। मेरा तो कई बार मौत से सामना हुआ है। जंग के मैदान में भी और कोर्ट मार्शल के कमरों में भी।
इसी संवाद से शुरू हुआ राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव जश्न ए विरासत की आखिरी संध्या में मंचित नाटक ‘कोर्ट मार्शल’। नाटक के माध्यम से दर्शकों ने एक सैनिक की कहानी देखी जो अपने ही अधिकारी की हत्या और एक अधिकारी पर जानलेवा हमले का आरोप झेल रहा है। भारत में जातिवाद व सामंतवाद की कुरीति पर कटाक्ष करते हुए इस नाटक ने दर्शकों को सोचने को मजबूर कर दिया।
स्वदेश दीपक लिखित व अरविंद गौड़ निर्देशित कोर्ट मार्शल नाटक में दिखाया गया कि किस प्रकार उच्च जाति वर्ग के अधिकारी नीची जाति से संबंध रखने वाले कैप्टन रामचंद्र को मानसिक प्रताड़ना देते हुए उसका जीना मुहाल कर देते हैं। मानसिक प्रताड़ना जब बर्दाश्त से बाहर होती हैं तो कैप्टन अपनी राइफल से अधिकारियों पर गोली चला देता है। जिस पर उसका सेना में कोर्ट मार्शल होता है। कोर्ट मार्शल के दौरान वकील कैप्टन के जुर्म को साबित करने से अधिक उन परिस्थितियों को उजागर करता है, जिसके चलते वह गोली चलाने को मजबूर हुआ। अंत में वह अधिकारी (कैप्टन बीडी कपूर) जो रामचंद्र के उत्पीड़न के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार है, वह कुंठित होकर गुस्से में गोली मारकर आत्महत्या कर लेता है।
पांच दिनों तक चौरास आडिटोरियम में चला महोत्सव
श्रीनगर। पांच दिनों तक चले राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव जश्न-ए-विरासत संपन्न हो गया है। समापन अवसर पर राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के प्राचार्य डा. सीएम रावत, एसडीएम कीर्तिनगर नूूपुर वर्मा, यूसेक के निदेशक डा. एमपीएस बिष्ट ने पुरस्कार वितरण किया। युवा लेखक नवल खाली, ऋषिराज भट्ट और मनीष जोशी को सम्मान दिया गया। इस अवसर पर प्रो. सुरेंद्र काला, प्रो. एआर डंगवाल, प्रो किरन डंगवाल, बलराज नेगी, आयोजन समिति के सचिव परवेज अहमद और पंकज मैंदोली आदि मौजूद थे।