ब्यूरो/ऋषिकेश। ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज के षोड़शी कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से आए संत-महात्माओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान ब्रह्मलीन स्वामी सच्चिदानंद के जीवनवृत्त पर प्रकाश डाला गया। इसके साथ ही स्वामी सच्चिदानंद की शिष्या साध्वी रामप्रिया रामायणी को उनका उत्तराधिकारी घोषित किया गया, संतों ने उन्हें महामंडलेश्वर की उपाधि भी दी। मुनिकीरेती स्थित दयानंदनगर शीशमझाड़ी में बृहस्पतिवार को सच्चिदानंद आश्रम में आयोजित षोड़शी में विभिन्न आश्रमों के संत, महामंडलेश्वर शामिल हुए।
उन्होंने ब्रह्मलीन संत सच्चिदानंद भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। बताया कि स्वामी सच्चिदानंद 21 अप्रैल 2009 को अचानक कोमा की अवस्था में चले गए थे। नौ वर्ष अस्वस्थता के बाद वह 28 फरवरी की सुबह ब्रह्मलीन हो गए। षोड़शी समारोह में 16 आश्रमों के महामंडलेश्वरों ने स्वामी सच्चिदानंद की गद्दी के लिए उनकी शिष्या साध्वी रामप्रिया रामायणी को उनका उत्तराधिकारी घोषित किया गया। इस मौके पर महामंडलेश्वर स्वामी अर्जुन पुरी, स्वामी आत्मप्रकाश यती, स्वामी कमल पुरी, स्वामी विश्वात्मानंद पुरी , स्वामी आनंद चेतन सरस्वती, स्वामी शिव प्रेमानंद, स्वामी आत्मानंद पुरी, रामेश्वरानंद सरस्वती, स्वामी विज्ञानांद आदि मौजूद थे।