ब्यूरो/मुनिकीरेती-ऋषिकेश । शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि गंगा स्वच्छता के कार्यों में कुछ वर्षों में तेजी आई है। महज सरकारी योजनाओं के भरोसे गंगा को निर्मल व अविरल नहीं रखा जा सकता। इसके लिए जन सहभागिता का होना बेहद जरुरी है। रविवार को परमार्थ निकेतन आश्रम परिसर में आयोजित राष्ट्रीय नदी गंगा समाधान शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन के कार्यक्रम का शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने विधिवत शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने सभी गंगा प्रहरियों व गंगा प्रेमियों को गंगा स्वच्छता के प्रति समर्पण भाव से कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए राज्य सरकार स्थान की उपलब्धता के अनुसार समाधान निकालने में जुटी है। स्वच्छता को लेकर एक जैसी तकनीक को हर जगह लागू करने से बेहतर परिणाम प्राप्त नहीं किए जा सकते।
उन्होंने बताया कि हरिद्वार शहर में 87 प्रतिशत सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट सुचारु रूप से संचालित हो रहे हैं, जबकि अवशेष 13 प्रतिशत सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को शीघ्र शुरू कराकर हरिद्वार सीवरेज के मामले में शत प्रतिशत कार्य करने वाला शहर बन जाएगा। इस दिशा में सरकार सतत रूप से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को जन सहभागिता से मॉडल राज्य के तौर पर स्थापित किया जा सकता है। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि ने कहा कि सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य मां गंगा को स्वच्छ व निर्मल बनाने के लिए एक मंच पर आकर कार्य करना है।
उन्होंने कहा कि अब गंगा की स्वच्छता के लिए सामुहिक तौर पर कार्य करने का समय आ गया है । सरकार के ग्रेड प्लान के साथ जनसमुदाय अपना ग्राउंड प्लान जोड़े तो जल्द बेहतर परिणाम सामने आ सकते हैं। इस मौके पर उन्होंने पांच राज्यों से आए गंगा प्रहरियों को नदियों को स्वच्छ रखने और गंगा तटों पर पौधरोपण का संकल्प दिलाया। इस मौके पर वाइल्ड लाइफ ऑफ इंडिया के डॉ. राजीव चौहान, जीवा की सचिव साध्वी भगवती सरस्वती, फिक्की के उप महासचिव निरंकार सक्सेना, मिशन निदेशक राजेश झा, विक्रांत महाजन, वीके जिंदल, प्रोफेसर श्रीनिवास चारी, डॉ. प्रवीण कुमार, रवि भटनागर, डॉ. अशोक घोष, डॉ. एसए हुसेन, डॉ. रुचि बडोला, नगर पंचायत स्वर्गाश्रम जौंक की अध्यक्ष शकुंतला राजपूत, आदित्यानंद सरस्वती, जीवा की निदेशक नंदनी त्रिपाठी, प्रोफेसर रचना विमल आदि मौजूद थे।