श्रीनगर। राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में फैकल्टी के रिक्त 16 पदों के लिए देहरादून में साक्षात्कार हुए, लेकिन आवेदक आए सिर्फ 13। ऐसे में फिलहाल मेडिकल कॉलेज और संबद्ध बेस अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार होना मुश्किल दिखाई दे रहा है। हालांकि मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि पिछली बार की तुलना में बेहतर स्थिति है। कुछ विभागों के ताले खुल सकते हैं।
मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में लंबे समय से फैकल्टी (संकाय सदस्यों) की कमी बनी हुई है। फैकल्टी की कमी की वजह से एमसीआई (भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद) की सिफारिश पर केंद्र सरकार ने पीजी कोर्स संचालन की अनुमति देने से मना कर दिया था। इसके अलावा इस साल एमबीबीएस मान्यता का नवीनीकरण भी होना है। यहां भी फैकल्टी की कमी की वजह से दिक्कत हो सकती है। फैकल्टी/विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी की वजह से कॉलेज का क्लीनिकल सेक्शन (बेस अस्पताल) भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। परेशानी यह है कि पिछले डेढ़ साल से शासन ने शासन ने फैकल्टी की नियुक्ति के लिए अनुमति नही दी थी। लगभग 5 पांच माह बाद गत दिवस शासन की अनुमति मिलने पर देहरादून में प्रोफेसर (6 ) और एसोसिएट प्रोफेसर (10) के पदों पर संविदा नियुक्ति के लिए इंटरव्यू हुए, लेकिन प्रोफेसर पद के लिए सिर्फ 4 और एसो. प्रो. पद के लिए 7 कैंडीडेट्स ने इंटरव्यू दिया। प्राचार्य मेडिकल कॉलेज श्रीनगर प्रो. सीएम रावत का कहना है कि साक्षात्कार प्रक्रिया सफल रही। कतिपय विभागों में फैकल्टी मिलने की उम्मीद है। शासन को नियुक्ति संबंधी पत्रावलियां प्रेषित कर दी जाएंगी।