श्रीनगर। गढ़वाल विवि के पर्यावरण विज्ञान विभाग में जल विकास, संरक्षण एवं प्रबंधन पर जन जागरूकता विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि जल संरक्षण एवं विकास पर विशेषज्ञों की ओर से दिए गए सुझावों पर कार्य करना होगा।
शुक्रवार को चौरास परिसर स्थित पर्यावरण विभाग में गोष्ठी आयोजित की गई। मुख्य अतिथि भू विज्ञान मंत्रालय भारत सरकार के संयुक्त सचिव डा. विपिन चंद्रा ने कहा कि शुद्ध एवं पीने योग्य जल की उपलब्धता के आंकड़े चौंकाने व डराने वाले हैं। हमें जल संरक्षण एवं विकास पर विशेषज्ञों द्वारा दिए गए सुझावों पर कार्य करना होगा। कहा कि भारत सरकार समुद्र के जल को पीने योग्य बनाने के लिए संयंत्र स्थापित कर रही है। लक्षदीप में इसके लिए 3 संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। बताया कि उत्तराखंड के 3 स्थानों पर डाप्लर लगाए जा रहे हैं, जिनमें से मसूरी व पिथौरागढ़ का चयन किया जा चुका है। उत्तराखंड योजना आयोग के सलाहकार एचपी उनियाल ने कहा कि विश्व की एक तिहाई जन संख्या जल संकट के दबाव से गुजर रही है। जल्द ही यह आंकड़ा दो तिहाई पहुंचने की संभावना है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण एवं वृद्धि की सर्वोत्तम विधि वर्षा जल दोहन है। हमें पारंपरिक विधि जैसे चाल, खाल को पुनर्जीवित करना होगा। कार्यक्रम में प्रभारी कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल, डा. एलएन ठकुराल, प्रो. एचसी नैनवाल, प्रो. मोहन पंवार, डा. आलोक गौतम आदि ने भी विचार व्यक्त किए।