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अनशनकारियों ने खुद को किया कमरे में कैद

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गैरसैंण। स्थायी राजधानी गैरसैंण बनाए जाने की मांग को लेकर आंदोलनकारियों का क्रमिक अनशन 38वें दिन भी जारी रहा। प्रशासन ने रविवार सुबह करीब पौने पांच बजे अनशनकारियों को फोर्स फीडिंग कराने के लिए उठाने की कोशिश की लेकिन अनशनकारियों ने खुद को कमरे में बंद कर लिया। प्रशासन की टीम के लौटने के बाद ही अनशनकारी कमरे से बाहर आए। इस दौरान हुए डाक्टरी परीक्षण में अनशनकारियों के स्वास्थ्य में गिरावट दर्ज की गई।
गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित करने की मांग पर रामलीला मैदान में 26 जनवरी से क्रमिक अनशन किया जा रहा है। आंदोलन के छठे चरण में 25 फरवरी से राज्य आंदोलनकारी धूमा देवी और बागेश्वर के महेश पांडे और 3 मार्च से शालिग राम अनशन पर हैं। अनशनकारियों के स्वास्थ्य में गिरावट को देखते हुए रविवार सुबह करीब पौने पांच बजे तहसीलदार नत्थी सिंह पंवार, थानाध्यक्ष आरएस नेगी के नेतृत्व में पुलिस टीम अनशनकारियों को फोर्स फीडिंग कराने के उद्देश्य से उन्हें उठाने के लिए रामलीला मैदान पहुंची, लेकिन अनशनकारियों ने इससे पहले ही खुद को एक कमरे में बंद कर लिया। आंदोलनकारियों की जिद के आगे प्रशासन को लौटना पड़ा। इसके बाद वे कमरे से बाहर आए।
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रविवार दोपहर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डा. विकास सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मियों ने अनशनकारियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। डा. विकास ने बताया कि अनशनकारियों का वजन गिरने के साथ ही पानी की कमी, रक्तचाप अनियंत्रित और अन्य दिक्कतें पाई गई हैं। इस पर अनशनकारियों को अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी गई। आंदोलन के समर्थन में कृष्णा नेगी, नंदन नेगी, सुरेंद्र सिंह रावत, समिति के अध्यक्ष नारायण सिंह विष्ट, व्यापार संघ के सुरेंद्र सिंह विष्ट, वीरेंद्र प्रसाद जोशी, कमला पंवार, सरोज शाह और जसवंत सिंह आदि ने धरना दिया।
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