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एक घंटे तक छिपे रहे दो अनशनकारी, अफरा तफरी मची

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गैैरसैंण। स्थायी राजधानी मांग को लेकर आंदोलनकारियों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार को प्रशासन ने अनशन पर बैठी एक बुजुर्ग महिला को जबरन उठाकर अस्पताल में भर्ती कराया। वहीं अनशनकारी महिला को जबरन उठाने पर आंदोलनकारियों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने बाजार में जुलूस निकालकर प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया।
रामलीला मैदान गैरसैंण में चल रहे आंदोलन के 33वें दिन मंगलवार को सुबह साढ़े चार बजे करीब प्रशासन के अधिकारी और भारी मात्रा में पुलिस फोर्स आंदोलन स्थल पर पहुंचे। इस दौरान आंदोलनकारियों और आठ दिन से अनशन पर बैठे प्रवीण सिंह, उच्च रक्तचाप की शिकायत वाले महेश पांडे और अंडर वेट सुशीला देवी को उन्हें जबरन उठाने की भनक लगी, तो भड़क उठे। इस दौरान आंदोलनकारियों और प्रशासन की तीखी बहस भी हुई। बाद में काफी विरोध के बीच प्रशासन अनशनकारी महिला सुशीला देवी को उठाने में कामयाब रहा। इससे गुस्साए लोगों ने प्रशासन के खिलाफ मुख्य बाजार में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों में समिति के अध्यक्ष नारायण सिंह, महामंत्री धनीराम, सुरेंद्र बिष्ट, रामप्रसाद उप्रेती, कृष्णा नेगी, सरोज शाह, कमला पंवार, खिमुली देवी, नंदन नेगी, लक्ष्मण पंवार, जसवंत आदि शामिल थे। मंगलवार को धूूमा देवी, त्रिलोक सिंह, बिंदी देवी सहित महेश पांडे का अनशन तीसरे दिन भी जारी रहा, जबकि प्रवीण सिंह 9वें दिन भी अनशन पर डटे रहे। इस दौरान स्वास्थ्य परीक्षण में प्रवीण सिंह का वजन साढ़े तीन किलो कम पाया गया, जबकि अन्य अनशनकारियों का वजन करीब एक किलो कम और शरीर में पानी की कमी पाई गई।
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अनशनकारी नहीं दिखे तो फूले हाथ-पांव
स्थायी राजधानी मांग को लेकर अनशन पर बैठे दो अनशनकारी मंगलवार सुबह अचानक लापता हो गए, इससे प्रशासन व ग्रामीणों के हाथ-पांव फूल गए। हालांकि बाद में करीब एक घंटे बाद दोनों अनशनकारी लौट आए, तो प्रशासन ने राहत की सांस ली। वहीं आठ दिन से अनशन पर बैठे प्रवीण सिंह ने बताया कि प्रशासन उन्हें जबरन उठाने के लिए पुलिस फोर्स के साथ पहुंचा है, इसकी जानकारी होते ही वे और महेश पांडे अनशन स्थल के पीछे चले गए थे।
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प्रजमं ने दिया आंदोलन को समर्थन
गैरसैंण। प्रगतिशील जन मंच ने के अनिल स्वामी के नेतृत्व में करीब 20 सदस्यीय दल ने रामलीला मैदान में पहुंचकर आंदोलन को समर्थन दिया। समर्थन देने वालों में डा. अरुण कुकसाल, सुधाकर भट्ट, सदानंद पुरी, दयाराम पुरी, रजनी देवी, चंद्रकला, कमली, रामेश्वरी, शशी, जगदंबा रतूड़ी, देव सिंह नेगी, सरस्वती, कुसुम पंवार, कांति पुरी आदि शामिल थे।
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