ब्यूरो/ऋषिकेश। ऊर्जा निगम की लापरवाही का शहर में यह कोई पहला उदाहरण नहीं है। इससे पहले निगम के जिम्मेदार लोगों की अनदेखी से एक लाइनमैन की मौत हो चुकी है। बावजूद निगम के अधिकारी हादसों से सबक लेने को तैयार नहीं हैं। सवाल है कि यदि लाइनमैन ने शटडाउन लिया था तो लाइन में कैसे करंट कैसे दौड़ गया? और यदि शटडाउन नहीं लिया तो लाइनमैन को चलती लाइन पर काम करने की जिम्मेदारी आखिर किसने दी। घटना के बाद अधिकारी खुद को बचाने की कोशिशें में जुट गए हैं, इसका अंदाजा अधिकारियों के बयानों से लगाया जा सकता है।
वर्ष 2016 में अगस्त माह के बाद मंगलवार को यह दूसरा मामला सामने आया है, जब ऊर्जा निगम की लापरवाही से सर्वहारानगर में एक बार फिर लाइनमैन चंद्रपाल विद्युत लाइन की मरम्मत करते हुए झुलस गया। अब अधिकारी मामले में जांच की बात कहकर लापरवाह कार्मिकों की करनी पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अनदेखी के चलते कर्मचारी के झुलसने से निगम की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। स्थानीय नागरिकों में भी निगम की अधिकारियों की लापरवाही को लेकर रोष है। उनका आरोप है कि निगम को कर्मचारियों की जान की कोई परवाह नहीं है, इसी वजह से इस तरह के हादसे सामने आ रहे हैं।
2016 में गई थी लाइनमैन की जान
ऊर्जा निगम की लापरवाही का यह कोई पहला मामला नहीं है। 28 अगस्त 2016 को जाटव बस्ती, ऋषिकेश निवासी लाइनमैन (संविदा) 40 वर्षीय सुभाष भी हरिद्वार रोड पर विद्युत लाइन की मरम्मत करते हुए अचानक लाइन में करंट दौड़ने से झुलस गया था। 29 अगस्त-16 को उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई थी। अधिकारियों ने इस मामले जांच कराने की बात कही थी, लेकिन इस जांच में आखिर खामी किस स्तर पर हुई थी, इसका आज तक कुछ पता नहीं चल पाया। समय के साथ निगम ने जांच भी ठंडे बस्ते में डाल दी। यदि लापरवाही को सामने लाया जाता, तो शायद ऐसा हादसा दोबारा पेश नहीं आता।
ट्रांसफार्मर पर ही लगा दिया मीटर
मंगलवार को सर्वहारानगर में जिस ट्रांसफार्मर की लाइन पर मरम्मत के दौरान लाइनमैन चंद्रपाल झुलसा है, उसी जगह पर एक झोपड़ी में निगम कर्मियों ने एक युवक को कनेक्शन दिया हुआ है और उसका मीटर झोपड़ी में नहीं, बल्कि ट्रांसफार्मर पर ही लगा रखा है। विभाग की इस लापरवाही से भी किसी वक्त बड़ा हादसा हो सकता है।