ब्यूरो/ऋषिकेश । भावातीत ध्यान योग के प्रणेता महर्षि महेश योगी की तपस्थली स्वर्गाश्रम स्थित शंकराचार्य नगर चौरासी कुटिया में बीती सदी में 1968 में अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त बैंडग्रुप बीटल्स के आगमन के बाद से तीर्थनगरी की ओर दुनिया का ध्यान आकर्षित हुआ और इसके बाद ही यहां विदेशी सैलानियों व जिज्ञासुओं की आमद बढ़नी शुरू हुई। शंकराचार्य नगर में आध्यात्मिक गतिविधियां बंद हुए लगभग ढाई दशक का समय अंतराल हो चुका है, इसके बावजूद आज भी तीर्थनगरी आने वाले विदेशी सैलानी यहां आकर चौरासी कुटिया के बारे में अपनी जिज्ञासाएं लोगों के सामने रखते हैं। सोमवार को चौरासी कुटिया में बीटल्स व महर्षि महेश योगी की दुर्लभ तस्वीरों के संग्रह की फोटो गैलरी के उद्घाटन अवसर पर मौजूद विदेशी पर्यटकों ने महर्षि महेश योगी की तपस्थली को लेकर अमर उजाला से अपने अनुभव साझा किए।
यूएसए के डॉनवोल्फ एलनॉर ने बताया कि महर्षि महेश योगी की तपस्थली शंकराचार्यनगर चौरासी कुटिया का वातावरण आज भी लोगों में योग और ध्यान की प्रेरणा का संचार करता है। बकौल एलनॉर वह आज इस दुनिया में नहीं हैं, मगर फिर भी यहां पर उनकी मौजूदगी का अहसास होता है। उन्होंने बताया कि महर्षि महेश योगी उनके गुरू रहे हैं, एलनॉर ने महर्षि के सानिध्य में वर्ष 1971 से 1975 तक शंकराचार्य नगर में योग और ध्यान की तालीम ली। एलनॉर बोले, उनकी तपस्थली में आकर शांति की अनुभूति होती है और इसीलिए बार-बार यहां पर आने को मन करता है।
कैलीफोर्निया की जॉन सिनक्लीयर ने बताया कि उन्हें महेश योगी तपस्थली में दो बार आने का अवसर मिला है। उनकी तपस्थली अपने आप में शांति का एक अद्भुत केंद्र है। यहां पर आकर हमें ध्यान और योग की प्रेरणा मिलती है। इजराइल से आई ज्योतदर ने बताया कि महर्षि ध्यान, योग के प्रणेता रहे हैं। उनकी तपस्थली शंकचार्यनगर में आकर इसकी प्रेरणा आज भी मिलती है। बकौल ज्योतदर सच में जब उन्होंने ऐसे एकांत स्थान पर लोगों को ध्यान, योग की शिक्षा दी होगी, वह अपने आप में अविस्मरणीय अनुभूति रही होगी।