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एनआईटी उतराखंड के लिए दताखेत में हुई महापंचायत

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श्रीनगर। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) उत्तराखंड के स्थायी परिसर निर्माण हेतु दत्ताखेत में महापंचायत का आयोजन किया गया। महापंचायत में तहसीलदार श्रीनगर सुनील राज ने ग्रामीणों के समक्ष एनआईटी के लिए भूमि की आवश्यकता और शंकाओं का समाधान किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि एनआईटी पहाड़ में ही रहेगी।
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शुक्रवार को सुमाड़ी, जलेथा, हरकंडी, दत्ताखेत और बलोड़ी के केंद्र बिंदु दत्ताखेत में महापंचायत आयोजित हुई। इस अवसर पर तहसीलदार ने बताया कि सुमाड़ी में जहां जमीन अधिग्रहीत की गई है। वहां कुछ ही भूमि निर्माण के लिए लायक बताई है। एनआईटी प्रशासन ने विकल्प के तौर पर तीन स्थानों (सुमाड़ी का निचला व ऊपरी भाग, जलेथा, हरकंडी, बलोड़ी, सुमाड़ी व दत्ताखेत और सुमाड़ी व दत्ताखेत) के नाम सुझाए थे। जिस पर तहसील प्रशासन ने तत्काल 104 हेक्टेअर भूमि का प्रस्ताव भेज दिया गया था। प्रशासन के स्तर पर कुछ भी लंबित नहीं है। कार्रवाई एनआईटी प्रशासन की ओर से होनी है।
प्रगतिशील जनमंच के अध्यक्ष अनिल स्वामी ने बताया कि कार्यक्रम में एनआईटी के निदेशक प्रो. एसएल सोनी को भी आना था। लेकिन पारिवारिक कारणों से उन्हे दिल्ली जाना पड़ा। उन्होंने बताया कि जितनी जल्दी ग्रामीण सहमति बनाकर जमीन देंगे। उतनी जल्दी काम होगा।
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महापंचायत में तय किया गया कि आगामी 24 फरवरी को राष्ट्रीय पुस्तक मेले के उद्घाटन में पहुंच रहे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ङ्क्षसह रावत से जलेथा के ग्रामीणों का शिष्टमंडल इस मसले पर मिलेगा।
अध्यक्षता ग्राम प्रधान जलेथा गुड्दी देवी और संचालन दिगंबर भंडारी व सुरजीत बिष्ट ने संयुक्त रुप से किया। इस मौके पर ग्राम प्रधान बलोड़ी धीरेंद्र भंडारी, हीरालाल जैन, सौरभ, दौलत ङ्क्षसह, रामचंद्र राणा, प्रभाव देवी, सुनीता पंवार और बलवीर चौहान आदि मौजूद थे।
श्रीनगर। एनआईटी के लिए प्रस्तावित जमीन में सबसे अधिक भूमि जलेथा की आ रही है। यहां लगभग 36 हेक्टेअर अधिग्रहण का प्रस्ताव है। इसके लिए विगत 10 जनवरी को गंाव में बैठक हुई थी। जिसमें 15 प्रस्ताव पारित किए गए थे। महापंचायत में तहसीलदार सुनील राज ने बिंदुवार मांग व शंकाओं का समाधान किया।
मांग 1-भूमिदाताओं को 5 गुना मुआवजा दिया जाए
समाधान- केंद्र सरकार फ्री में जमीन लेती है। एनआईटी को जहां निशुल्क भूमि मिलती है, निर्माण हो जाएगा। हालांकि ग्रामीण स्थानीय स्तर पर राज्य सरकार तक मांग पहुंचा सकते हैं।
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मांग 2- स्थानीय निवासियों को नियुक्ति, टेंडर और व्यापार का हक दिया जाए।
समाधान- एनआईटी निर्माण के साथ-साथ मांगों पर भी कार्रवाई होती जाएगी।
मांग 3- ग्रामीणों के हक हकूक, गौचरान और पानी के स्रोतों के साथ छेड़छाड़ न हो।
समाधान- सुप्रीम कोर्ट की रुलिंग है कि पानी के स्रोत नष्ट न किए जाए।
मांग 4- एनआईटी बस अड्डा, बाजार और केंद्रीय विद्यालय बनाए।
समाधान- एनआईटी का निर्माण विस्तृत क्षेत्र में होना है। सभी सुविधाएं मिलेंगी।
मांग 5- एनआईटी में कचरा निस्तारण की व्यवस्था की जाए।
समाधान- सभी व्यवस्थाए होंगी।
मांग 6- एनआईटी में कितने ग्रामीणों की भूमि अधिग्रहीत की जा रही है।
समाधान- अभी मोटे तौर पर प्रस्ताव बनाया गया है।
मांग 7- एनआईटी का नाम जलेथा के नाम पर हो।
समाधान- एनआईटी उत्त्तराखंड के नाम से है।
जारी
सन्दीप
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