ऋषिकेश। तीर्थनगरी ऋषिकेश और इससे सटे ग्रामीण इलाकों के लोगों को जल्द सीवर सुविधा मिलने की उम्मीद है। निर्माण एवं अनुरक्षण इकाई (गंगा) ने इसके लिए करीब 342 करोड़ रुपये का ऋषिकेश सीवर योजना प्रोजेक्ट तैयार किया है, जिसका क्रियान्वयन जर्मनी की कंपनी केएफडब्ल्यूके वित्तीय सहयोग से किया जाएगा।
निर्माण एवं अनुरक्षण इकाई (गंगा) की ऋषिकेश यूनिट के मुताबिक नगर निकाय ऋषिकेश, गुमानीवाला, वीरपुर खुर्द व खदरी खड़कमाफ गांव को इस प्रोजेक्ट के तहत सीवर लाइन से जोड़ा जाना है। करीब 206 किलोमोटर लंबी इस सीवर योजना पर लगभग 342 करोड़ रुपए खर्च होंगे, जिसके लिए फंडिंग जर्मन सरकार की कंपनी की ओर से की जानी है। उक्त धनराशि के लिए सरकार व कंपनी के बीच लोन एग्रीमेंट साइन होना है, जिसके बाद यूनिट योजना पर तेजी के साथ धरातल पर कार्य शुरू करेगी।
बताया गया कि गंगा और नगरीय स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए सुविधा विहीन क्षेत्रों को सीवर योजना से जोड़ने का प्लान तैयार किया गया है। प्रस्ताव को राज्य सरकार के माध्यम से केंद्र सरकार को भेज दिया गया है। जर्मन कंपनी केएफडब्ला्यू के साथ योजना पर खर्च होने वेाली रकम के लिए ऋण करार पर हस्ताक्षर होते ही काम शुरू किया जाएगा।
गुमानीवाला और खदरी में बनेंगे एसटीपी
ऋषिकेश। निर्माण एवं अनुरक्षण इकाई गंगा ने ग्रामीण इलाकों में सीवर के पानी का ट्रीटमेंट करने के लिए लक्कड़घाट में 26 एमएलडी के ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने के अलावा गुमानीवाला 1.15 और खदरी में 2 एमलडी क्षमता का एसटीपी तैयार किया जाना प्रस्तावित है। यूनिट को लक्कड़घाट में 6 एमएलडी के एसटीपी को अपग्रेड कर 26 मिलीयन लीटर डेली एमएलडी किए जाने के लिए नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत 158 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिल चुकी है।
यह इलाके हैं योजना में शामिल
ऋषिकेश। ऋषिकेश सीवर योजना में नगर निकाय ऋषिकेश के अलावा प्रगति विहार, शैल विहार, इंदिरानगर, बापूग्राम, निर्मल बाग, आम बाग, वीरपुरखुर्द, खदरी खड़कमाफ, गुमानीवाला, बीबीवाला, तुलसी विहार आदि इलाकों को शामिल किया गया है।
क्या कहते हैं अधिकारी
ऋषिकेश सीवर योजना का प्रस्ताव राज्य सरकार के माध्यम से केंद्र सरकार को भेज दिया गया है। जिसमें दो छोटे एसटीपी का भी प्रावधान किया गया है। योजना को लेकर जर्मनी की कंपनी केएफडब्ल्यू के साथ केंद्र और राज्य सरकार का लोन एग्रीमेंट साइन होना है, जिसमें 342 करोड़ की इस योजना को भी शामिल किया गया है। एग्रीमेंट होने के बाद योजना पर कार्य शुरू किया जाएगा।
- संदीप कश्यप, परियोजना प्रबंधक, निर्माण एवं अनुरक्षण इकाई (गंगा)।