गोपेश्वर। चमोली जिले में शिवरात्रि पर्व को लेकर लोग असमंजस में हैं। कई लोगों ने मंगलवार को शिवालयों में जलाभिषेक किया। गोपीनाथ मंदिर में श्रद्धालु सुबह से ही जलाभिषेक के लिए उमड़े। इस दौरान कीर्तन-भजन का आयोजन भी किया गया। वहीं जोशीमठ, पीपलकोटी, दशोली, घाट और पोखरी क्षेत्र में लोग 14 फरवरी को शिवरात्रि मनाएंगे। ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि 14 फरवरी को महाशिवरात्रि व्रत है। व्रत को लेकर भ्रम की स्थिति बनी है। 13 को त्रयोदशी है और रात साढ़े दस बजे के बाद चतुर्दशी शुरू हो रही है। लिहाजा शिवरात्रि का पर्व चौदह फरवरी को भी होगा।
शिव को प्रसन्न करने के लिए रावण ने दी नौ सिरों की आहुति
गोपेश्वर। चमोली जिले के वैरासकुंड में पौराणिक शिव मदिर लंकापति रावण की तपस्थली रही है। मान्यता है कि इसी स्थान पर भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए रावण ने तप कर यज्ञकुंड में अपने नौ सिरों की आहुति दी थी। रावण जब यज्ञकुंड में अपने दसवें सिर की आहुति देने लगा तो तभी भगवान शिव ने रावण को दर्शन दिए और अंतिम सिर की आहुति देने से रोक लिया। यहां शिव ने रावण को बल और मृत्यु पर विजय पाने का वरदान दिया था।
स्कंद पुराण के केदार खंड में वैरासकुंड क्षेत्र का दसमोलेश्वर के नाम से उल्लेख किया गया है। वैरासकुंड में जिस स्थान पर रावण ने शिव की तपस्या की वह कुंड, यज्ञशाला और शिव मंदिर आज भी यहां विद्यमान हैं। इस स्थान पर पौराणिक और पुरातत्व महत्व की कई चीजें हैं। कुछ समय पहले यहां खुदाई के दौरान एक कुंड मिला, जबकि आस-पास खुदाई करने पर प्राचीन ईटें निकलीं। मंदिर के शिव लिंग पर शिव और पार्वती की हल्की आकृति दिखाई देती है। 60 वर्षीय त्रिलोचन प्रसाद और मदन सिंह ने बताया कि सिद्धपीठ वैरासकुंड में 14 फरवरी शिवरात्रि के मौके पर भव्य मेले का आयोजन होगा।