श्रीनगर। अलसुबह घर में झाड़ू लेकर साफ-सफाई का काम शुरू होता है। बावजूद इसके आमतौर पर झाड़ू को कमाई का बड़ा जरिया नहीं माना जाता, लेकिन एक प्राइवेट कंपनी की नौकरी छोड़कर टिहरी जिले के मलेथा (सेमवालगांव) निवासी मधुसूदन सेमवाल ने इसे रोजगार का बड़ा जरिया बना लिया है। वह इससे सात अन्य लोगों को भी रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं। श्रीनगर के समीप बिल्वकेदार में झाड़ू बनाने का लघु उद्योग स्थापित कर वह पौड़ी, चमोली, रुद्रप्रयाग और टिहरी जिलों में झाड़ू की सप्लाई कर रहे हैं।
35 वर्षीय मधुसूदन सेमवाल दो साल पहले सहारनपुर के समीप अपने एक दोस्त के गांव गए थे। वहां उन्होंने फूल और सीक झाड़ू बनाने का काम देखा। यहीं से उनके दिमाग में विचार आया कि क्यों न पहाड़ में यह काम शुरू जाए। काम को मूर्त रूप देने में एक साल लग गया। इससे पहले वह एक मल्टीनेशनल कंपनी में सात वर्ष तक सेल्स का काम करते थे।
झाड़ू बनाने और प्रशिक्षण देने के लिए वह फैजाबाद से एक कुशल कारीगर लाए। गुवाहटी से कच्चा सामान मंगवाया। श्रीनगर से चार किमी दूर बिल्वकेदार में काम शुरू किया। पहले दुकानदारों ने उनके झाड़ू खरीदने में हिचकिचाहट दिखाई। लेकिन गुणवत्ता के बल पर धीरे-धीरे बाजार का उन पर विश्वास बढ़ता गया। काम चला तो उन्होंने छोटा मालवाहक वाहन भी खरीद लिया। कर्मचारियों की संख्या भी सात पहुंच गई। आज वह पहाड़ के 4 जिलों में प्रतिमाह लगभग 5 लाख रुपये का झाड़ू बेचते हैं।
सरकार मदद करे तो रुक सकता है पलायन
मधुसूदन बताते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान को देखते हुए जहां-तहां लोग सफाई अभियान में जुटे हैं। ऐसे में झाड़ू की खपत बढ़ी है। हालांकि सरकारी स्तर पर उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। वह कहते हैं कि सरकारी विभाग और निकायों से उन्हें आर्डर मिले तो वह कई और लोगों को भी रोजगार उपलब्ध करा सकते हैं। कहते हैं स्वरोजगार के लिए दृष्टि चाहिए। कई सामान ऐसे हैं, जिन्हें हम बाहर से मंगवाते हैं, जबकि लघु उद्योग लगाकर यहां भी उसका उत्पाद किया जा सकता है। इसमें सरकार सहयोग करे पहाड़ से काफी हद तक पलायन पर रोक लगाया जा सकता है।
हम पहाड़ में ही झाड़ू बनाने का काम कर रहे हैं। भले ही वर्तमान में ज्यादा आमदनी न हो रही हो, लेकिन भविष्य में यह जरूर बढ़ेगी। यदि मैं कंपनी में काम कर होता, तो प्रतिमाह 50 हजार सैलरी ले रहा होता। लेकिन मुझे अपने काम करने का जुनून था। इसलिए यह काम शुरू किया। - मधुसूदन सेमवाल, संचालक ऑल ब्रूम उद्योग बिल्वकेदार