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पीएम को भेजा खून से लिखा पत्र

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गैरसैंण। स्थायी राजधानी की मांग को लेकर रामलीला मैदान में चल रहे आमरण अनशन के पांचवें दिन अनशनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खून से लिखा पत्र भेजा है। सोमवार को तहसीलदार दर्शनलाल मैठाणी ने अनशनस्थल पर पहुंचकर आंदोलनकारियों से अनशन समाप्त करने का अनुरोध किया लेकिन अनशनकारी अपनी मांग पर अडिग रहे।
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गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित करने की मांग को लेकर 12 दिसंबर से संघर्ष समिति ने रामलीला मैदान में क्रमिक अनशन किया था। मांग पर कार्रवाई नहीं होते देख समिति ने 26 जनवरी से यहां भूख हड़ताल शुरू की। अनशन पर बैठे वीरेंद्र आर्य, ध्यान सिंह और नारायणबगड़ के गंभीर सिंह जब अनशन तोड़ने को तैयार नहीं हुए तो सातवें दिन प्रशासन ने तीनों आंदोलनकारियों को जबरन उठाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया। इसके बाद समिति के त्रिलोक सिंह, धन सिंह और हरीश पंत बृहस्पतिवार से आमरण अनशन पर बैठ गए।
सोमवार को अनशनकारी हरीश पंत ने ब्लेड से अपनी उंगली काटकर खून से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पत्र लिखा। पत्र में हरीश पंत ने प्रधानमंत्री से गैरसैंण को स्थायी राजधानी गैरसैंण बनाने की मंजूरी देने की मांग की है। इस दौरान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्साधीक्षक डा. मनीभूषण पंत ने अनशनकारियों का स्वास्थ्य जांचा। डा. पंत ने बताया कि अनशनकारियों का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है। साथ ही रक्तचाप भी अनियमित हो रहा है। उन्होंने अनशनकारियों को अस्पताल में भर्ती होने की राय दी है। इस बीच तहसीलदार दर्शन लाल मैठाणी ने अनशनस्थल पर पहुंचकर अनशनकारियों से आंदोलन समाप्त करने की बात कही, लेकिन अनशनकारियों ने तहसीलदार की बात नहीं मानी। सोमवार को आंदोलन को समर्थन देने वालों में नारायण सिंह बिष्ट, जसवंत सिंह, सरोज शाह, कमला पंवार, सुरेंद्र सिंह, वीरेंद्र बिष्ट, धनीराम, खिमुली देवी, मंजू बिष्ट सहित कई महिलाएं शामिल थी।
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