फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

संस्कृत व्याकरण सबसे अधिक वैज्ञानिक व्याकरण

विज्ञापन
विज्ञापन
देवप्रयाग। श्री रघुनाथ कीर्ति राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान में चल रहे अंतरराष्ट्रीय सेमीनार में वेद की राष्ट्रीय गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें देश के विभिन्न क्षेत्र से आए विद्वानों और शोधार्थियों ने अपने शोध पत्रों के माध्यम से संस्कृत में वेद की महत्व को बताया। इसमें संस्कृत को सबसे अधिक व्यापक व्याकरण बताया गया।
विज्ञापन

संगोष्ठी के मुख्य अतिथि केंद्रीय गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर के अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो. डीआर पुरोहित ने संस्कृत श्लोकों का उच्चारण कर संस्कृत की महत्ता प्रदर्शित की। उन्होंने संस्कृत व्याकरण को विश्व का सबसे अधिक वैज्ञानिक व्याकरण बताया। ब्राह्मण शब्द वर्ण आधारित है न कि जातिवाचक। इसके साथ ही उन्होंने कहा जन्मना जायते शुद्र: कर्मणा दिवजोयंते यानि कि जन्म से सभी शुद्र ही पैदा होते हैं कर्म उसे ब्राह्मण बनाता है।
शिव मंदिर देवप्रयाग के स्वामी पांडुरंगा मुरुगेशन ने अपने जीवन में संन्यासी बनने की घटना की चर्चा की। उन्होंने स्वामी रामकृष्ण परमहंस से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
विज्ञापन

संस्थान के प्राचार्य प्रो. केवी सुब्बरायुडू ने व्याकरण को सभी विषयों का आधार बताया। गोष्ठी के समान पर शोधार्थियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। गोष्ठी का संचालन डा. सुरेश शर्मा और डा. मनीष जुगरान ने किया। इस अवसर पर न्याय प्रभारी डा. आर बालमुरुगन, डा. शैलेंद्र उनियाल और प्रो. बिस्वाल आदि मौजद थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें