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परमजीत और मानषी की जीत पर गोपेश्वर और मंडल घाटी में जश्न का माहौल

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गोपेश्वर। राष्ट्रीय स्तर के खेलो इंडिया खेलो 2018 में आयोजित 5000 व 3000 मीटर की वॉक रेस में चमोली के परमजीत और मानसी के गोल्ड जीतने पर गांव के युवाओं ने आतिशबाजी कर जश्न मनाया। वॉक रेस में भारत की ओर से ओलंपिक में प्रतिभाग कर चुके मंडल घाटी के युवा मनीष को परमजीत और मानसी अपना आदर्श मानते हैं।
जिले के गैरसैंण निवासी सुरेंद्र सिंह के बाद लगातार जिले के कई खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फलक पर प्रतिभा का जलवा बिखेर चुके हैं। इसी फेहरिस्त में अब परमजीत और मानषी का नाम भी जुड़ गया है। चमोली के खल्ला गांव निवासी मानसी गोपेश्वर के कन्या हाईस्कूल नैग्वाड़ में दसवीं की छात्रा हैं, जबकि परमजीत जीआईसी बैरांगना में ग्यारहवीं का छात्र है। दोनों खिलाड़ियों ने अपनी जीत का श्रेय कोच गोपाल बिष्ट को दिया है। दोनों खिलाड़ी माध्यम परिवार से हैं। मानषी के पिता लखपत सिंह का देहांत होने के बाद उसकी माता रामेश्वरी देवी पेंशन से घर का खर्चा चलाती हैं, जबकि परमजीत के पिता जगत सिंह बिष्ट काश्तकारी करते हैं।
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परमजीत कहते हैं कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाग कर गोल्ड मेडल हासिल कर ओलंपिक तक पहुंचने की इच्छाशक्ति बढ़ी है। ओलंपियन मनीष मेरे आदर्श हैं। मानसी का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाग करना मेरा सपना था। आज यह सपना पूरा हुआ है। आगे भी प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर जिला व राज्य का गौरव बढ़ाऊंगी। ओलंपियन मनीष मेरे आदर्श रहे हैं।
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इंसेट
आज तक पूरी नहीं हुई पूर्व शिक्षा मंत्री की घोषणा
गोपेश्वर। वर्ष 2014 में वॉक रेसर मानसी ने राज्य स्तरीय विद्यालयी खेलकूद प्रतियोगिता में 200, 400 और 600 मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल जीता था। तब तत्कालीन शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने मानसी को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की थी, लेकिन आज तक पूर्व शिक्षा मंत्री की घोषणा पूरी नहीं हुई है। भाकपा माले के राज्य कमेटी सदस्य इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि सरकारों का खेलों के प्रति उदासीन रवैया है। खेल प्रतिभाएं स्वयं के संसाधनों से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपनी प्रतिभा दिखा रही हैं।
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